पश्चिम एशिया तनाव: सीआईआई ने सरकार की सराहना की और 12 सूत्रीय एजेंडा पेश किया

Industry Response Plan: सीआईआई ने पश्चिम एशिया संकट पर सरकार के कदमों की प्रशंसा की और औद्योगिक स्थिरता के लिए 12 सूत्रीय कार्य योजना पेश की है ताकि आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा सुरक्षा बनी रहे।
CII Praises Government Action on West Asia Tensions and Issues 12-Point Plan
कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Mitigating West Asia Conflict Impact: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय उद्योग जगत ने अपनी ठोस प्रतिक्रिया दी है। कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री यानी सीआईआई ने केंद्र सरकार के कड़े फैसलों का स्वागत किया है। उन्होंने इस वैश्विक संकट के प्रभाव को कम करने के लिए एक विस्तृत रणनीति बनाई है। पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से यह महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

सरकार के कदमों की सराहना

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि सरकार की प्रतिक्रिया बेहद संतुलित और समयोचित रही है। उन्होंने माना कि इससे आपूर्ति श्रृंखला सुचारू रखने और निर्यातकों को बड़ा सहारा मिला है। सरकार के इन ठोस उपायों ने भारतीय परिवारों को तेल की बढ़ती कीमतों से बचाने का काम किया है।

औद्योगिक सुरक्षा के लिए योजना

सीआईआई ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए एक विशेष 12 सूत्रीय कार्य योजना तैयार की है। इस योजना के तहत उद्योग और सरकार मिलकर कच्चे माल और ईंधन का रणनीतिक भंडार बनाएंगे। यह साझा बुनियादी ढांचा किसी भी बड़ी वैश्विक बाधा के खिलाफ देश की तैयारी को मजबूत करेगा।

महंगाई और मूल्य स्थिरता

कंपनियों से आग्रह किया गया है कि वे स्थिर ईंधन कीमतों का लाभ आम उपभोक्ताओं तक जरूर पहुंचाएं। इससे न केवल मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी बल्कि उद्योग की साख भी काफी बढ़ेगी। मूल्य स्थिरता बनाए रखने से वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भी आर्थिक विकास जारी रह सकेगा।

ऊर्जा के नए स्रोत

वर्तमान संकट ने पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने और हरित ऊर्जा अपनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। कंपनियां अब नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसे आधुनिक क्षेत्रों में अपना निवेश और बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा एलपीजी से प्राकृतिक गैस की ओर रुख करना लागत प्रबंधन में काफी सहायक होगा।

एमएसएमई और कर्मचारियों का साथ

बड़ी कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने एमएसएमई भागीदारों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करें। आर्थिक झटकों के दौरान कर्मचारियों की आजीविका की सुरक्षा करना उद्योग की सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। आंतरिक दक्षता बढ़ाकर और लागत प्रबंधित कर रोजगार के अवसरों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सकता है।

निर्यात और रसद प्रबंधन

निर्यातकों को अनिश्चित परिस्थितियों में अपने जोखिम प्रबंधन प्रथाओं को और अधिक मजबूत करना आवश्यक होगा। सरकार ने 28 फरवरी से संकट शुरू होने के बाद आरओडीटीईपी दरों और ईसीजीसी कवरेज को बढ़ाया है। इन उपायों से माल ढुलाई और बीमा संबंधी व्यवधानों को दूर करने में बहुत सहायता मिली है।

भविष्य की मजबूत नींव

कंपनियों को ऐसी डेटा प्रणालियों में निवेश करना चाहिए जो आपूर्ति श्रृंखला की दृश्यता को प्रभावी रूप से बढ़ाती हों। अनुबंधों और खरीद प्रथाओं में लचीलापन लाने से बाहरी झटकों का असर काफी हद तक कम हो जाएगा। डेटा पारदर्शिता और तकनीक का उपयोग भारतीय उद्योग को भविष्य में और अधिक सशक्त बनाएगा।

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