Cafe Coffee Day : कैफे कॉफी डे का होगा शटर डाउन, कंगाल होने की कगार पर है कंपनी
कैफे कॉफी डे की पेरेंट कंपनी सीडीईएल लंबे समय से परेशानी में चल रही है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट की 21 फरवरी की टाइम लिमिट के अंदर अपना आदेश जारी करने में फेल रहने के बाद ये फैसला लिया है।
- Written By: अपूर्वा नायक
कैफे कॉफी डे (सौ. सोशल मीडिया )
नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी कॉफी चेन में से एक कैफे कॉफी डे का इस समय बुरा समय चल रहा है। बताया जा रहा है कि इस कंपनी की दिवालिया प्रोसेस एक बार फिर से शुरू हो गई है। ये कॉफी लवर्स के लिए एक जोरदार झटका है।
कैफे कॉफी डे की पेरेंट कंपनी सीडीईएल लंबे समय से परेशानी में चल रही है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट की 21 फरवरी की टाइम लिमिट के अंदर अपना आदेश जारी करने में फेल रहने के बाद ये फैसला लिया है।
सबसे पहले कंपनी के गलती की बात कर लेते हैं। कंपनी पर 2228 करोड़ के डिफॉल्ट का आरोप है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में मामला जाने के बाद से ही कंपनी पर प्रेशर बना हुआ है। हालांकि एनसीएलटी के आखिरी फैसले ना लेने के बाद भी कंपनी पर दिवालियापन की प्रोसेस फिर से शुरू हो गई है। अब इंवेस्टर्स और कॉरपोरेट सेक्टर की निगाहें नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के आने वाले अगले आदेश पर टिकी हुई है।
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एनसीएलटी ने उठाया ये कदम
इससे पहले एनसीएलटी की चेन्नई ब्रांच ने कैफे कॉफी डे की पेरेंट कंपनी सीडीईएल के निलंबित बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के द्वारा अपील पर सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर निर्देश देते हुए इसे 21 फरवरी तक निपटाने का आदेश जारी किया था। हालांकि ऐसा हो नहीं पाया।
फैसला सुनाने में देरी होने के कारण एनसीएलटी की ओर से पारित पूर्व आदेश को निरस्त माना जाएगा। 22 फरवरी 2025 से कॉरपोरेट दिवाला जो सोल्यूशन प्रोसेस है, उसे दोबारा शुरू कर दिया गया है। इसकी जानकारी खुद कंपनी ने शेयर मार्केट को दी है। सीडीईएल ने शेयरों के बारे में जानकारी देते हुए बताया था कि एनसीएलटी का आखिरी आदेश आना अभी बाकी है।
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28.4 करोड़ का डिफॉल्ड
सीडीईएल के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया 8 अगस्त 2024 को शुरू हुई थी, जब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी एनसीएलटी की बेंगलुरु बेंच ने आईडीबीआई ट्रस्टीशिप सर्विसेज लिमिटेड की याचिका को मंजूरी दी थी। इसमें 28.4 करोड़ के डिफॉल्ट का दावा किया गया था। कर्ज में डूबी इस कंपनी के संचालन की देखरेख के लिए एक आईआरपी को नियुक्त किया गया था। निलंबित बोर्ड ने इस फैसले को कोर्ट में चैलेंज किया। जिसके कारण एनसीएलटी ने 14 अगस्त 2024 को कारवाई पर रोक लगा दी थी।
