Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • विदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी न्यूज़
  • फैक्ट चेक
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो

  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • होम
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

Budget 2026: क्या होता है फिस्कल डेफिसिट और रेवेन्यू डेफिसिट? जानें बजट के इन दो सबसे भारी शब्दों का मतलब

Budget 2026: बजट में टैक्स और खर्च की घोषणाओं के अलावा कुछ ऐसे अहम आंकड़े होते हैं, जो देश की आर्थिक सेहत को दर्शाते हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा फिस्कल डेफिसिट और रेवेन्यू डेफिसिट की होती है।

  • Written By: मनोज आर्या
Updated On: Jan 26, 2026 | 09:26 PM

(कॉन्सेप्ट फोटो, सोर्स-AI)

Follow Us
Close
Follow Us:

Fiscal Deficit And Revenue Deficit: आगामी केंद्रीय बजट 2026 को लेकर बाजार, निवेशक और आम नागरिक सभी की नजरें सरकार की वित्तीय स्थिति पर टिकी हुई हैं। बजट में टैक्स और खर्च की घोषणाओं के अलावा कुछ ऐसे अहम आंकड़े होते हैं, जो देश की आर्थिक सेहत को दर्शाते हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) और रेवेन्यू डेफिसिट (राजस्व घाटा) की होती है। इसलिए इनके बारे में हर किसी को जानना बेहद जरूरी होता है।

फिस्कल डेफिसिट का मतलब होता है सरकार के कुल खर्च और उसकी कुल आय (उधारी को छोड़कर) के बीच का अंतर। सरल शब्दों में कहें तो यह बताता है कि सरकार को अपने खर्च पूरे करने के लिए कितनी राशि उधार लेनी पड़ेगी। उदाहरण के तौर पर, अगर केंद्र सरकार एक साल में 50 लाख करोड़ रुपए खर्च करती है, लेकिन टैक्स और अन्य स्रोतों से उसकी आय 35 लाख करोड़ रुपए होती है, तो फिस्कल डेफिसिट 15 लाख करोड़ रुपए होगा।

सबसे ज्यादा देखे जाने वाले आंकड़ों में एक

फिस्कल डेफिसिट बजट के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले आंकड़ों में से एक होता है, क्योंकि यह सरकार के वित्तीय अनुशासन को दर्शाता है। कम फिस्कल डेफिसिट यह संकेत देता है कि सरकार अपने खर्च और आय पर नियंत्रण रखे हुए है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ता है। वहीं ज्यादा फिस्कल डेफिसिट का मतलब ज्यादा उधारी, जिससे ब्याज दरें बढ़ सकती हैं और निजी निवेश पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा यह तय करता है कि सरकार के पास इंफ्रास्ट्रक्चर, कल्याणकारी योजनाओं और रक्षा पर खर्च करने के लिए कितनी गुंजाइश है।

सम्बंधित ख़बरें

27 जनवरी को देशभर के बैंकों में हड़ताल, पूरे दिन बंद रहेंगे बैंक; घर से निकलने से पहले जानें डिटेल्स

Budget 2026: बजट के दिन बाजार में ‘बंपर कमाई’ या ‘बड़ा घाटा’? देखें पिछले 5 सालों का हैरान करने वाला रिकॉर्ड

Budget 2026: क्या है लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स? जानें बजट से पहले इसे हटाने की मांग क्यों हो रही

गणतंत्र दिवस पर भारत-EU की महासंधि: ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ से बदलेगी वैश्विक अर्थव्यवस्था, जानें कहां होगा फायदा

सरकार फिस्कल डेफिसिट को मुख्य रूप से उधारी के जरिए पूरा करती है, जिसके लिए घरेलू बाजार में सरकारी बॉन्ड जारी किए जाते हैं। छोटी बचत योजनाओं और भविष्य निधि (पीएफ) से धन लिया जाता है और कुछ हद तक विदेशी उधारी भी की जाती है। आज की ज्यादा उधारी आने वाले वर्षों में ब्याज का बोझ बढ़ा देती है, जिससे भविष्य के बजट में विकास से जुड़े खर्चों के लिए जगह कम हो जाती है।

ज्यादा फिस्कल डेफिसिट हमेशा नकारात्मक नहीं

ज्यादा फिस्कल डेफिसिट हमेशा नकारात्मक नहीं माना जाता। आर्थिक सुस्ती, वैश्विक अनिश्चितता या महामारी जैसी असाधारण परिस्थितियों में सरकार का ज्यादा खर्च करना अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकता है। हालांकि, अगर लंबे समय तक फिस्कल डेफिसिट ऊंचा बना रहे, तो इससे सरकारी कर्ज बढ़ता है और महंगाई व ब्याज दरों पर दबाव पड़ सकता है। इसलिए सरकारें आमतौर पर मध्यम अवधि के लिए फिस्कल कंसोलिडेशन यानी घाटा कम करने का रोडमैप पेश करती हैं।

वहीं, रेवेन्यू डेफिसिट उस स्थिति को दर्शाता है जब सरकार का रोजमर्रा का खर्च उसकी नियमित आय से ज्यादा हो जाता है। इसे सरकार के रेवेन्यू एक्सपेंडिचर (राजस्व व्यय) और रेवेन्यू रिसीप्ट्स (राजस्व प्राप्ति) के बीच के अंतर के रूप में देखा जाता है। जब आय से ज्यादा खर्च होता है, तो रेवेन्यू डेफिसिट दर्ज किया जाता है।

क्या होता है रेवेन्यू रिसीप्ट्स?

रेवेन्यू रिसीप्ट्स में सरकार की टैक्स से होने वाली आय जैसे इनकम टैक्स, जीएसटी और कॉरपोरेट टैक्स, साथ ही नॉन-टैक्स आय जैसे सरकारी कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड, फीस और ब्याज शामिल होते हैं। वहीं रेवेन्यू एक्सपेंडिचर में वे खर्च आते हैं जिनसे कोई स्थायी संपत्ति नहीं बनती, जैसे कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, सब्सिडी, रक्षा खर्च, कल्याणकारी योजनाएं और ब्याज भुगतान।

रेवेन्यू डेफिसिट की गणना सीधी होती है। उदाहरण के लिए, अगर सरकार का रेवेन्यू खर्च 30 लाख करोड़ रुपए है और रेवेन्यू आय 27 लाख करोड़ रुपए है, तो रेवेन्यू डेफिसिट 3 लाख करोड़ रुपए होगा। बजट में इसे आमतौर पर जीडीपी के प्रतिशत के रूप में दिखाया जाता है।

वित्तीय सेहत का अहम संकेत

रेवेन्यू डेफिसिट सरकार की वित्तीय सेहत का अहम संकेतक माना जाता है। ज्यादा रेवेन्यू डेफिसिट यह दिखाता है कि सरकार निवेश के बजाय रोजमर्रा के खर्चों के लिए उधारी ले रही है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क और रेल जैसे पूंजीगत खर्चों के लिए उपलब्ध संसाधन सीमित हो जाते हैं, जो लंबे समय की आर्थिक वृद्धि के लिए जरूरी होते हैं।

यह भी पढ़ें: 27 जनवरी को देशभर के बैंकों में हड़ताल, पूरे दिन बंद रहेंगे बैंक; घर से निकलने से पहले जानें डिटेल्स

जब रेवेन्यू डेफिसिट होता है तब

जब रेवेन्यू डेफिसिट होता है, तो सरकार को उस कमी को पूरा करने के लिए कर्ज लेना पड़ता है, जिससे सार्वजनिक ऋण बढ़ता है। लंबे समय तक रेवेन्यू डेफिसिट बने रहने से भविष्य के बजट में ब्याज का बोझ बढ़ता है और निजी निवेश पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से बजट विश्लेषक इस बात पर खास नजर रखते हैं कि सरकार अपनी आय बढ़ाने और खर्चों को तर्कसंगत बनाने के लिए क्या कदम उठा रही है।

Budget 2026 what are fiscal deficit and revenue deficit

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Jan 26, 2026 | 09:26 PM

Topics:  

  • Budget 2026
  • Business News
  • Today Business News

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.