

BSNL Fixed Broadband: भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) का सफर भारत में टेलीकम्युनिकेशन के सौ साल से ज्यादा के इतिहास को समेटे हुए है। यह ब्रिटिश जमाने की टेलीग्राफ सर्विस से सरकारी टेलीकॉम कंपनी बनने, भारी आर्थिक संकट का सामना करने और हाल ही में ब्रॉडबैंड परफॉर्मेंस में वापसी करने तक का सफर रहा है।
देखा जाए तो BSNL की शुरुआत ब्रिटिश जमाने में ही हो गई थी। भारत की सरकारी टेलीग्राफ और टेलीफोन सर्विस की जड़ें 1851 में मिलती हैं, जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने पहली टेलीग्राफ लाइन शुरू की थी। आम लोगों के लिए यह सर्विस 1854 में शुरू हुई, और इसके बाद 1885 में इंडियन टेलीग्राफ एक्ट पास हुआ।
धीरे-धीरे इसका विकास होता रहा और यह विभाग अपने कदम आगे बढ़ाता रहा। 1975 में टेलीग्राफ सर्विस को पोस्टल सर्विस से अलग कर दिया गया, जिससे 1980 में एक अलग टेलीग्राफ विभाग बना।
फिर लैंडलाइन का दौर आया। 1990 में लैंडलाइन सर्विस शुरू की गई, जिससे पूरे देश में सरकार के नेतृत्व वाला फिक्स्ड-लाइन कम्युनिकेशन नेटवर्क बना। फिर आया वह दिन जब BSNL का आधिकारिक तौर पर गठन किया गया।
15 सितंबर 2000 को (आधिकारिक तौर पर अक्टूबर 2000 में काम शुरू हुआ), भारत सरकार ने टेलीकॉम और टेलीग्राफ के कामकाज को संभालने के लिए भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) को 100% सरकारी पब्लिक सेक्टर कंपनी के तौर पर बनाया।
2000 के दशक की शुरुआत BSNL के लिए सुनहरा दौर रहा। इसी बीच मोबाइल की शुरुआत भी की गई। BSNL ने अक्टूबर 2002 में अपनी मोबाइल सर्विस शुरू की और बाजार में अपना दबदबा बनाया। मोबाइल सर्विस शुरू होने के सिर्फ 1.5 से 2 साल के अंदर, BSNL भारत की नंबर 1 मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर बन गई।
1990 और 2000 के दशक में, BSNL का कोई बड़ा प्राइवेट कॉम्पिटिटर नहीं था, जिससे यह शहरी और ग्रामीण भारत में कनेक्टिविटी के लिए पहली पसंद बन गई। पीक इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करें तो अप्रैल 2019 तक BSNL के पास 2 96 करोड़ की बेसिक टेलीफोन क्षमता, 1.46 लाख फिक्स्ड एक्सचेंज, 11.58 करोड़ मोबाइल सब्सक्राइबर और 1.17 करोड़ वायरलाइन कनेक्शन थे।
27 सितंबर, 2013 को बेंगलुरु में एमएस रामानुजन और पी नागराजू के साथ BSNL के सीजीएम कर्नाटक सर्कल आर के मिश्रा ने जीपीओ में "मोबाइल मनी ट्रांसफर" लॉन्च किया।
लेकिन फिर वो दौर आया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी, गिरावट और वित्तीय संकट का दौर। शुरुआती दबदबे के बावजूद, BSNL को अगले दो दशकों में गंभीर ऑपरेशनल और वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इस बीच प्राइवेट कंपनियों ने बाजार में कदम रख दिया था और जनता का रूझान उस ओर बढ़ने लगा।
इस दौर में प्राइवेट टेलीकॉम दिग्गज जैसे Jio, Airtel और Vodafone मार्केट में आए और उसे प्राइवेट कंपनियों का मुकाबला करना पड़ा। सिर्फ अकेले Reliance Jio ने 3-4 सालों में 40 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर जोड़े, जिससे BSNL का यूजर बेस कम हो गया।
सब्सक्राइबर कम होने से संस्थागत और तकनीकी रुकावटें बढ़ने लगी। तेजी से टेक्नोलॉजी-आधारित होते जा रहे इस उद्योग में BSNL के कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा नॉन-टेक्निकल था, जिससे योग्य इंजीनियरों की कमी हो गई।
मार्केटिंग और इनोवेशन की कमी ने BSNL कंपनी को पीछे कर दिया। प्राइवेट कंपनियों की तुलना में कंपनी कमजोर मार्केटिंग रणनीतियों, सर्विस इनोवेशन की कमी और कस्टमर बनाने की बेअसर योजनाओं से जूझती रही।
नई टेक्नॉलोजी के सामने जनता ने प्राइवेट कंपनियों की सर्विसेस को चुना और BSNL की ऐतिहासिक टेलीग्राम सर्विस जुलाई 2015 में आधिकारिक तौर पर बंद करना पड़ा। क्योंकि इस दौरान BSNL पर लगभग ₹20,000 करोड़ का कर्ज हो गया, जिससे कंपनी गहरे वित्तीय संकट में फंस गई थी।
BSNL को फिर सरकार ने सहारा दिया। नेशनल कैरियर को बचाने के लिए, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जुलाई 2022 में ₹1.64 लाख करोड़ के व्यापक रिवाइवल पैकेज को मंजूरी दी। इसी के साथ सरकार ने BSNL का भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड (BBNL) के साथ विलय करने की मंजूरी भी दी।
दोनों के साथ आने से BSNL एक बार फिर अपने पैरों पर खड़ा हुआ। इस विलय से BSNL को BBNL के 5.67 लाख किलोमीटर लंबे ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का पूरा कंट्रोल मिल गया, जिससे उसकी ब्रॉडबैंड क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई।
लगातार पांच सालों तक क्वालिटी में सुधार के बाद, BSNL ने फिक्स्ड-लाइन इंटरनेट में अपनी परफॉर्मेंस में जबरदस्त सुधार दिखाया है। साल 2026 में BSNL फिक्स्ड ब्रॉडबैंड में टॉप स्थान पर रहा।
फ्रेंच नेटवर्क टेस्टिंग फर्म nPerf की एक रिपोर्ट के अनुसार, BSNL ने 89,174 nPoints के साथ भारत में फिक्स्ड-लाइन इंटरनेट के लिए पहला स्थान हासिल किया है, और Airtel (74,975) व Jio (73,957) को पीछे छोड़ दिया है।
BSNL ने डाउनलोड स्पीड में साल-दर-साल 21% की बढ़ोतरी (78 5 Mbps तक पहुंचते हुए) हासिल की और अपलोड स्पीड (75 26 Mbps), लेटेंसी, वेब ब्राउजिंग और YouTube स्ट्रीमिंग अनुभव के मामले में इंडस्ट्री में सबसे आगे रहा।
मार्केट शेयर की स्थिति में सुधार देखा गया। साल 2026 में जहां Airtel सबसे ज्यादा फाइबर-टू-द-होम (FTTH) स्पीड (241 72 Mbps) के मामले में आगे है। jio और Airtel मार्केट शेयर सबसे आगे है। Jio (31 36%) व Airtel (21 34%) का मार्केट शेयर सबसे ज्यादा बना हुआ है। वहीं फरवरी 2026 तक BSNL के पास 15.45% मार्केट शेयर है।