फिर महंगा होगा पेट्रोल! इजरायल के एक फैसले से कच्चे तेल में 2% का उछाल, लेबनान में भड़की युद्ध की चिंगारी
Crude Oil Prices: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें दो प्रतिशत से अधिक बढ़ीं। इजरायल-लेबनान संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट खुलने में देरी से निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
- Written By: अक्षय साहू
कच्चे तेस की कीमतों में उछाल (सोर्स- सोशल मीडिया)
Crude Oil Prices Hike: मध्य-पूर्व एशिया में तनाव अपना चरम पर है, जिसका असर वैश्विक तेल व्यापार पर स्पष्ट नजर आ रहा है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों एक बार फिर 2 प्रतिशत की उछाल देखने को मिल रही है। इसका कारण इजरायल द्वारा लेबनान पर किए गए हमले और अपनी सेना को आगे बढ़ने के आदेश देने के फैसले को माना जा रहा है।
इजरायल ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया हैस, जब दोनों देशों के बीच सीजफायर का ऐलान हुए छह हफ्ते से अधिक समय बित चुका है। हालांकि सीजफायर के ऐलान के बाद भी इस क्षेत्र में अभी तक शांति स्थापित नहीं हो पाई है।
तेल की कीमतों में 2 प्रतिशत का उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी कच्चे तेल (WTI) की कीमत 2.37 डॉलर या 2.71 प्रतिशत बढ़कर 89.73 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.16 डॉलर या 2.37 प्रतिशत बढ़कर 93.28 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
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जानकारों का मानना है कि इजरायल और लेबनान के बीच बढ़ते संघर्ष ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम विस्तार की उम्मीदों को कमजोर कर दिया है। इससे पहले शुक्रवार को वाशिंगटन में इजरायल और लेबनान के बीच शांति वार्ता आयोजित की गई थी, जिसके बाद बाजार में कुछ राहत देखने को मिली थी। हालांकि, इजरायल द्वारा अपनी सेना को लेबनान में आगे बढ़ने के आदेश ने निवेशकों की चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं।
ईरान के साथ शांति समझौते के करीब ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया कि वह जल्द ही ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव पर फैसला लेंगे। इस समझौते का मकसद क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवादों का समाधान खोजना है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यापक समझौते में हिजबुल्लाह को शामिल किया जाना चाहिए।
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होर्मुज खुलने में अभी और समय
इस बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान द्वारा समुद्री माइंस बिछाए जाने की आशंका से इस के पूरी तरह खुलने में देरी हो सकती है। अब क्योंकि वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना हुआ है।
