RBI का बड़ा कदम: बैंकिंग सिस्टम में 1.41 लाख करोड़ रुपये डाले, आम लोगों का लोन सस्ता होने की उम्मीद
RBI Big Move: भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए 1,41,171 करोड़ रुपये डाले हैं। यह कदम नकदी की कमी से जूझ रहे बैंकिंग सिस्टम को स्थिर करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
- Written By: दिव्या सिंह
भारतीय रिजर्व बैंक (सोर्स-सोशल मीडिया)
RBI Major Move On Indian Banks: भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को बैंकिंग प्रणाली में भारी मात्रा में नकदी डालते हुए 1,41,171 करोड़ रुपये जारी किए। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब सिस्टम में नकदी की कमी (Liquidity Shortage) देखी जा रही थी। आंकड़ों की माने तो हाल के दिनों में बैंकिंग सिस्टम सरप्लस से घाटे की स्थिति में पहुंच गया था। विशेषज्ञों के अनुसार इससे बैंकों की लोन देने की क्षमता बढ़ेगी और भविष्य में आम लोगों के लिए कर्ज लेना आसान और सस्ता हो सकता है।
क्यों आई नकदी की कमी?
आंकड़ों के मुताबिक, 21 जून को बैंकिंग सिस्टम में 30,685 करोड़ रुपये का सरप्लस था, जो 22 जून तक 19,971 करोड़ रुपये के घाटे में बदल गया। यह बदलाव मुख्य रूप से जीएसटी भुगतान और अन्य निकासी दबावों के कारण हुआ, जिससे बाजार में नकदी की उपलब्धता कम हो गई।
VRR नीलामी के जरिए RBI का हस्तक्षेप
RBI ने यह राशि वैरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी के माध्यम से बैंकों को उपलब्ध कराई। VRR एक ऐसा उपकरण है जिसके जरिए केंद्रीय बैंक अस्थायी रूप से बैंकिंग सिस्टम में नकदी की कमी या अधिकता को संतुलित करता है। इस नीलामी में औसत कट-ऑफ दर 5.26 प्रतिशत रही, जिससे बाजार में ब्याज दरों और तरलता को नियंत्रित करने में मदद मिली।
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आम लोगों को कैसे मिलेगा फायदा?
जब बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी होती है तो बैंकों को लोन देने में आसानी होती है। इससे होम लोन, ऑटो लोन और बिजनेस लोन जैसे कर्जों की उपलब्धता बढ़ती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे बाजार में क्रेडिट फ्लो बेहतर होता है और धीरे-धीरे ब्याज दरों पर भी दबाव कम हो सकता है।
मनी मार्केट पर असर
तरलता की कमी के चलते ओवरनाइट मनी मार्केट दरों में दबाव बढ़ गया था। हाल के आंकड़ों के अनुसार, कॉल मनी रेट 5.43 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो कि RBI की रेपो दर से भी अधिक थी। इस स्थिति को संतुलित करने के लिए केंद्रीय बैंक ने पिछले कुछ दिनों में विभिन्न VRR नीलामियों के जरिए लगभग 2.43 लाख करोड़ रुपये की अस्थायी नकदी प्रणाली में डाली है।
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पिछले कुछ दिनों में RBI ने कई चरणों में VRR के माध्यम से नकदी उपलब्ध कराई है, जिसमें ओवरनाइट से लेकर सात-दिवसीय नीलामी तक शामिल हैं। इसका उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में स्थिरता बनाए रखना और बाजार में तरलता संकट को रोकना है।
