RBI का बड़ा फैसला, रेपो रेट में नहीं हुआ बदलाव; लेकिन आपकी जेब पर क्या होगा असर?

What Is Repo Rate: आरबीआई के इस फैसले का सीधा असर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) पर पड़ता है। रेपो रेट स्थिर रहने से आपकी मौजूदा ईएमआई में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।
repo rate impact on common people
रेपो रेट, (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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RBI Unchanged Repo Rate In MPC: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट को स्थिर रखने का निर्णय लिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली समिति ने ब्याज दरों में कोई फेरबदल नहीं किया है। हालांकि यह फैसला ऊपर से साधारण लग सकता है, लेकिन इसके पीछे वैश्विक तनाव और महंगाई को लेकर गहरी चिंताएं छिपी हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आरबीआई के इस कदम का आपके बजट और देश की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

क्या होती है रेपो रेट?

रेपो रेट वह दर है जिस पर देश का केंद्रीय बैंक (RBI) अन्य कमर्शियल बैंकों को कर्ज देता है। जब रेपो रेट बढ़ती है, तो बैंकों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है, जिसका बोझ वे ग्राहकों पर डालते हैं। इसके विपरीत, रेपो रेट स्थिर रहने का मतलब यह है कि फिलहाल ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम है।

आपकी EMI और लोन पर असर

आरबीआई के इस फैसले का सीधा असर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) पर पड़ता है। रेपो रेट स्थिर रहने से आपकी मौजूदा ईएमआई में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। यदि आप नया घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो बैंक आपसे ज्यादा ब्याज वसूलने की स्थिति में नहीं होंगे। हालांकि दरें नहीं बढ़ी हैं, लेकिन आरबीआई ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। यदि भविष्य में महंगाई बढ़ती है, तो बैंक अपने स्तर पर दरों में मामूली बदलाव कर सकते हैं।

मिडिल ईस्ट युद्ध और महंगाई का खतरा

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है, लेकिन अमेरिका-ईरान संघर्ष एक बड़ा 'नकारात्मक जोखिम' (Downside Risk) है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे। तेल महंगा होने से माल ढुलाई बढ़ेगी, जो सीधे तौर पर खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामान की कीमतों को बढ़ा सकती है।

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और बचत

जो लोग अपनी बचत पर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के जरिए ब्याज कमाते हैं, उनके लिए यह खबर मिली-जुली है। चूंकि रेपो रेट नहीं बढ़ी है, इसलिए बैंकों द्वारा एफडी पर मिलने वाली ब्याज दरों में भी फिलहाल बढ़ोतरी की उम्मीद कम है। हालांकि, तरलता (Liquidity) की कमी को देखते हुए कुछ बैंक ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए चुनिंदा अवधि की एफडी पर ऊंचे ब्याज की पेशकश जारी रख सकते हैं।

भविष्य के लिए RBI का अनुमान

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.9% रहने का प्रारंभिक अनुमान लगाया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में किसी भी प्रकार की रुकावट वैश्विक व्यापार को बाधित कर सकती है, जिससे भारत की विकास दर प्रभावित होगी।

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