क्रूड आयल रिफाइनरी
India refining capacity route: बांग्लादेश अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूसी कच्चा तेल आपूर्ति का भारत के रास्ते उपयोग करना चाहता है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण ऊर्जा संकट से निपटने के लिए यह भारत की रिफाइनिंग क्षमता का मार्ग का विचार किया जा रहा है। इस योजना के तहत तेल मंगाने, भारत में रिफाइनिंग और ट्रांसपोर्ट का सारा खर्च खुद Bangladesh की सरकार उठाने वाली है। बांग्लादेश के ऊर्जा विभाग ने G2G स्तर के समझौते के लिए मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू को एक प्रस्ताव भी भेजा है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चटगांव में स्थित Bangladesh की एकमात्र सरकारी रिफाइनरी रूसी कच्चे तेल के लिए उपयुक्त नहीं है। रूस से आने वाला कच्चा तेल हेवी ग्रेड का होता है, और यह रिफाइनरी केवल मिडिल ईस्ट के तेल के लिए बनी है। इसकी वार्षिक क्षमता 1.5 मिलियन टन है, जिससे बांग्लादेश को रिफाइंड फ्यूल के आयात पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ता है।
Bangladesh के विदेश मंत्री की भारत यात्रा में डीजल आयात बढ़ाने के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच गहरी चर्चा हुई। सिलीगुड़ी से दिनाजपुर के पार्वतीपुर तक सीमा-पार पाइपलाइन नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड से डीजल आयात में काफी मदद करती है। वर्ष 2023 में दोनों पड़ोसी देशों के बीच डीजल आयात के लिए 15 साल का एक महत्वपूर्ण समझौता भी किया गया था।
रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट से बांग्लादेश को अप्रत्यक्ष आयात के नए विकल्प तलाशने का अच्छा मौका मिला है। बांग्लादेश अब रूस से सीधे तौर पर 600,000 टन तक डीजल आयात करने का एक बहुत बड़ा प्रस्ताव रख रहा है। रूसी राजदूत अलेक्जेंडर खोजिन ने भी ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू से मिलकर ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग पर बात की।
यह भी पढ़ें: Islamabad में 21 घंटे की शांति वार्ता विफल, ईरान ने अमेरिका के लीबिया मॉडल को मानने से किया इनकार
भारत की अत्याधुनिक रिफाइनरियों का उपयोग करने से बांग्लादेश को रिफाइनिंग कॉस्ट और समय दोनों की बहुत बड़ी बचत होगी। यह सरकार से सरकार स्तर का समझौता बांग्लादेश को वर्तमान आपूर्ति संकट से बाहर निकालने में काफी ज्यादा मददगार साबित होगा। इस नई और रणनीतिक साझेदारी से भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्ते भविष्य में और भी ज्यादा मजबूत होंगे।