फेल हुआ ट्रंप का टैरिफ कार्ड! भारत ने चुपके से बदल लिया प्लान, अब इन देशों के साथ करेगा कारोबार

Trump Tariff War: ट्रंप जब से दूसरी बार अमेरिका की सत्ता पर काबिज हुए, वह लगातार हर दूसरे दिन किसी न किसी देश के खिलाफ टैरिफ का ऐलान करते नजर आ रहे हैं। भारत पर वह 50% टैरिफ लगा चुके हैं।
India's Trade Partner Countries
नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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India's Trade Partner Countries: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा होने वाला है। ट्रंप जब से दूसरी बार अमेरिका की सत्ता पर काबिज हुए, वह लगातार हर दूसरे दिन किसी न किसी देश के खिलाफ टैरिफ का ऐलान करते नजर आ रहे हैं। इस क्रम में ट्रंप ने भारत जैसे अपने बड़े ट्रेडिंग पार्टनर को भी नहीं बख्शा है।

फिलहाल भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा हुआ है, लेकिन अगर भारत ने रूस के साथ तेल की खरीद जारी रखता है, तो इसे बढ़ाकर 500 प्रतिशत तक किया जा सकता है। इसी तरह अगर भारत ने ईरान के साथ ट्रेड रिलेशन बनाए रखा, तो अलग से 25 प्रतिशत का एक्स्ट्रा टैरिफ लग सकता है। यानी कि फिलहाल भारत पर 575 प्रतिशत टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है।

भारत ने अपना ट्रेड पॉलिसी बदला

ट्रंप के इन्हीं नए-नए फरमानों से दोनों देशों के बीच व्यापार और कूटनीतिक संबंध बिगड़ गए हैं। हालांकि, इसी बदलाव ने भारत को अपनी व्यापार रणनीति को फिर से बनाने, निर्यात बाजारों में विविधता लाने, अमेरिका से परे संबंधों को मजबूत बनाने और अपनी इकोनॉमी को एकतरफा व्यापार झटकों से बचाने के लिए मजबूर किया।

उम्मीदों से बेहतर इकोनॉमी का प्रदर्शन

भारत के लेटेस्ट ट्रेड डेटा से पता चलता है कि देश की इकोनॉमी उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन कर रही है। दिसंबर के ट्रेड आंकड़ों में एक्सपोर्ट में मजबूती दिखी। ट्रंप के टैरिफ लगाने के बाद भारत ने पश्चिम एशिया, अफ्रीका, यूरोप और चीन जैसे नॉन-US मार्केट में मौके तलाशने शुरू कर दिए। इसी का नतीजा है कि दिसंबर में चीन के लिए एक्सपोर्ट 67 प्रतिशत बढ़कर 2 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि भारत के सबसे बड़े एक्सपोर्ट मार्केट अमेरिका को भेजे गए सामान में 1.8 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 6.8 बिलियन डॉलर रहा।

यूरोपियन यूनियन से साथ बनी बात

यह अमेरिका के ही दबाव का नतीजा है कि भारत ने दूसरे देशों के साथ ट्रेड रिलेशन को मजबूत करने पर जोर दिया। भारत ने UAE, ऑस्ट्रेलिया, ओमान, UK जैसे दूसरे देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और आर्थिक पार्टनरशिप साइन की हैं। यूरोपियन यूनियन के साथ भी लंबे समय से अटकी ट्रेड डील भी अब फाइनल होने के करीब है।

इस ट्रेड डील के चलते भारत के 99 प्रतिशत उत्पाद  को यूके के बाजारों में फ्री एक्सेस मिलेगा। वहीं, भारत में मामूली 3 परसेंट की टैरिफ के साथ यूके के 99 प्रतिशत सामानों को आयात किया जा सकेगा।

लैटिन अमेरिका और अफ्रीका पर नजर

भारत ने लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के साथ भी जुड़ाव बढ़ाया है और ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव के बीच खुद को एक वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग और सोर्सिंग हब के तौर पर पेश किया है। इन देशों के बाजारों में भारतीय उत्पादों को मौका मिलेगा और अमेरिका पर निर्भरता कम होगी।

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