एअर इंडिया प्लेन क्रैश से बीमा कंपनियों का बुरा हाल, उठाना पड़ सकता है 1000 करोड़ रुपये का बोझ
एअर इंडिया का मलिकाना हक टाटा ग्रुप के पास है। टाटा ने इस प्लेन क्रैश में जान गंवाने वाले हर एक पैसेंजर के परिवार को 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है।
- Written By: मनोज आर्या
अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त एअर इंडिया विमान की तस्वीर, (फोटो- सोशल मीडिया)
नई दिल्ली: गुजरात के अहमदाबाद में एअर इंडिया बोइंग 787 ड्रीमलाइनर क्रैश होने के बाद इंश्योरंस क्लेम अमाउंट 1,000 करोड़ को पार कर गई है। एविएशन सेक्टर में यह अब तक का सबसे महंगा इंश्योरेंस क्लेम है। यह अमाउंट देश के पूरे एविएशन सेक्टर के टोटल वार्षिक प्रीमियम से भी काफी अधिक है।
गौरतलब है कि एअर इंडिया का मलिकाना हक टाटा ग्रुप के पास है। इस प्लेन क्रैश में जान गंवाने वाले हर एक पैसेंजर के परिवार को 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि देने के लिए टाटा ने घोषणा की है। इस हादसे में कुल 241 लोगों की जान गई है। ऐसे में यह अनुमाना है कि इंश्योरेंस क्लेम 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जिसका एविएशन इंश्योरेंस इंडस्ट्री पर बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है।
मॉन्ट्रियल कन्वेंशन 1999 के तहत मुआवजा देने की मांग
एक्सपर्ट्स का कहना है कि एअर इंडिया के दुर्घटनाग्रस्त प्लेन के पैसेंजर्स के परिजनों को मुआवजा मॉन्ट्रियल कन्वेंशन 1999 के तहत दिया जाना चाहिए। यानी कि मृतकों के आश्रितों को 1,28,821 SDR (स्पेशल ड्राइंग राइट्,) का भुगतान करना होगा, जो मौजूदा दरों के हिसाब से प्रति यात्री 1.4 करोड़ रुपये बैठता है। वर्तमान समय में एक एसडीआर की कीमत 120 रुपये है, जो अमेरिकी डॉलर, चीनी रॅन्मिन्बी, यूरो, जापानी येन और ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग इन पांच मुद्राओं पर आधारित है। हालांकि, अंतिम भगतान इस बात पर निर्भर करेगा कि एअर इंडिया ने अपने यात्रियों के लिए कितनी बीमा पॉलिसी ली थी।
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मॉन्ट्रियल कन्वेंशन क्या है?
हवाई यात्रा से जुड़े अलग-अलग मुद्दों के लिए मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के तहत एक कानूनी प्रेमवर्क होता है, जो यात्रियों के हित में होता है। इस कानून के अनुसार, यदि कोई एयरलाइन कंपनी किसी पैसेंजर को पहुंचने वाले नुकसान का जिम्मेदार है, तो उन्हें अनिवार्य रूप से मुआवजे का भुगतान करना होगा। बता दें कि साल 2009 में भारत ने मॉन्ट्रियल कन्वेंशन को अपनाया था। मॉन्ट्रियल कन्वेंशन ( एक अंतरराष्ट्रीय विमानन संधि) के तहत, एयरलाइनों को मौत के मामले में प्रति यात्री लगभग 171,000 डॉलार या ( 1,28,821 SDR) का मुआवजा देना जरूरी है। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह प्रति व्यक्ति 250,000 डॉलर हो सकता है।
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कैसे किया जाता है मुआवजे का कैलकुलेशन?
ब्रोकरेज फर्म हाउडेन (इंडिया) के एमडी और सीईओ अमित अग्रवाल ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा कि मुआवजे का कैलकुलेशन एसडीआए के इस्तेमाल से की जाती है, जो अक्टूबर 2024 तक 128,821 एसडीआर (लगभग 1.33 अमेरिकी डॉलर प्रति SDR) था। फाइनल पेमेंट एअर इंडिया के लिए गए कवरेज पर निर्भर करेगा।
