8वां वेतन आयोग (सोर्स-सोशल मीडिया)
8th pay commission state benefits: देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारी 8वें वेतन आयोग की घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन राज्यों में इसकी स्थिति काफी पेचीदा बनी हुई है। वर्तमान में केरल जैसे राज्यों में 11वां वेतन आयोग लागू है, जबकि पंजाब जैसे राज्यों में अभी छठा वेतन आयोग ही चल रहा है। राज्य सरकारें अपनी वित्तीय स्थिति और बजट के अनुसार वेतन संशोधन पर निर्णय लेती हैं, जिससे केंद्र और राज्यों के बीच एक बड़ा अंतर दिखाई देता है। आइये जानते हैं कि राज्य कर्मचारियों को नए वेतन ढांचे का लाभ कब मिलेगा और एरियर की गणना किस आधार पर की जाएगी।
केंद्र सरकार जब भी नया वेतन आयोग लागू करती है, उसका लाभ सबसे पहले केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलता है। राज्य सरकारें केंद्र की सिफारिशों को सीधे लागू करने के बजाय अपना स्वयं का ‘स्टेट पे कमीशन’ गठित करती हैं। इसका मुख्य कारण राज्यों की अलग-अलग वित्तीय क्षमता और राजस्व संग्रह होता है, जो उन्हें वेतन वृद्धि का स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए प्रेरित करता है।
भारत के अलग-अलग राज्यों में वेतन आयोग की स्थिति में कोई एकरूपता नहीं है, जो कर्मचारियों के बीच भ्रम पैदा करती है। केरल में जहां 11वां आयोग प्रभावी है, वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्य वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के ढांचे पर चल रहे हैं। असम ने हाल ही में अपने 8वें राज्य वेतन आयोग के गठन की प्रक्रिया शुरू की है, जो आगामी बदलावों का संकेत देता है।
आमतौर पर राज्य सरकारें फिटमेंट फैक्टर को केंद्र के प्रस्तावित स्तर के आसपास ही रखने का प्रयास करती हैं। 7वें वेतन आयोग के दौरान केंद्र का फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जिसे उत्तर प्रदेश ने हुबहू अपनाया, जबकि पंजाब ने इसे 2.59 रखा था। 8वें वेतन आयोग में भी यही उम्मीद है कि राज्य अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार फिटमेंट फैक्टर में मामूली बदलाव कर सकते हैं।
राज्य कर्मचारियों के लिए एरियर का निर्धारण पुराने वेतन आयोग की अवधि समाप्त होने की अगली तारीख से किया जाता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी राज्य में 7वें आयोग की अवधि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रही है, तो 1 जनवरी 2026 से नए वेतन का लाभ मिलना चाहिए। हालांकि, वास्तविक भुगतान में राज्य सरकारें अक्सर 1 से 3 साल तक का समय ले लेती हैं, जिससे कर्मचारियों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।
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8वें वेतन आयोग का लाभ राज्य कर्मचारियों को मिलना तय है, लेकिन इसकी सटीक समय-सीमा पूरी तरह राज्य सरकार के विवेकाधीन है। कुछ प्रगतिशील राज्य इसे केंद्र के साथ ही लागू कर देते हैं, जबकि अधिकांश राज्य वित्तीय बोझ को देखते हुए इसे किश्तों में लागू करते हैं। कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि सरकार एरियर के भुगतान को लेकर कितनी पारदर्शिता और तत्परता दिखाती है।