

8th Pay Commission Latest Update: आठवें वेतन आयोग की बैठकों का सिलसिला जारी है। कई शहरों में बैठक के बाद देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 22 और 23 अक्टूबर को एक बैठक होने जा रही है। इस मीटिंग में केंद्र सरकार के संगठन, संस्थान, एसोसिएशन और यूनियनों को नए वेतन आयोग के सदस्यों के साथ बातचीत के लिए बुलाया गया है।
वित्त मंत्रालय की ओर से 21 अक्टूबर को जारी एक नोटिफिकेशन के मुताबिक, इंटरेस्टेड स्टेकहोल्डर 10 अक्टूबर 2026 तक तय ऑनलाइन फॉर्म के जरिए अपॉइंटमेंट के लिए अपनी रिक्वेस्ट सबमिट कर सकते हैं।
मुंबई में होने वाली मीटिंग आयोग के स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन प्रक्रिया का एक हिस्सा है। इससे पहले आठवें वेतन आयोग ने 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु मीटिंग की घोषणा किया था, जिसमें संस्था और एसोसिएशन को आयोग के साथ बैठक के लिए बुलाया गया था। बेंगलुरु विजिट के लिए ऑनलाइन रिक्वेस्ट फॉर्म भरने की आखिरी तारीख 18 सितंबर थी।
अब तक अलग-अलग शहरों में हुई बैठकों में कर्मचारियों और पेंशनर्स ने आयोग के सामने कई मांगे रखी है, जिसमें फिटमेंट फैक्टर बढ़ोतरी, इंक्रीमेंट में बढ़ोतरी, डीए मर्जर, एचआरए में इजाफा, पेंशन में इजाफा और पुराने पेंशन की वापसी शामिल है।
आठवें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों और पेंशनर्स ने अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर की मांग की है, लेकिन सबसे ज्यादा 2.75 तक फिटमेंट फैक्टर रखने की बात की जा रही है। अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों की वेतन में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे 18,000 रुपये की मिनिमम बेसिक सैलरी बढ़कर 49,500 रुपये तक हो जाएगी। इसी तरह पेंशन की बात करें तो 12,000 रुपये की बेसिक पेंशन बढ़कर 33,000 रुपये हो जाएगी।
केंद्रीय कर्मचारियों ने सरकार से यह मांग की है कि महंगाई को नियंत्रण में रखने कर्मचारियों की वेतन के साथ न्याय करने के लिए हर साल कम से कम छह फीसदी का इंक्रीमेंट किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें महंगाई से राहत मिल सके।
इसके साथ ही कर्मचारियों और पेंशनभोगियों ने सरकार से मांग की है कि उनकी सैलरी में मौजूदा महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) को मर्ज किया जाए। अगर सच में ऐसा किया जाता है तो कर्मचारियों की सैलरी में अधिक बढ़ोतरी हो सकती है। अभी कर्मचारियों को 60 फीसदी महंगाई भत्ता मिलता है।
आठवें वेतन आयोग को जनवरी 2025 में नोटिफाई किया गया था और शुरू में इसके 1 जनवरी, 2026 से लागू होने की उम्मीद थी, लेकिन इसके तुरंत लागू होने की उम्मीद कम है। पिछले पे कमीशन को सरकार की मंजूरी और रोलआउट से पहले अपनी रिपोर्ट जमा करने में आम तौर पर दो से तीन साल लगते थे।
इसका मतलब है कि कर्मचारियों को अपनी पे स्लिप में रिवाइज्ड सैलरी दिखने से पहले ज़्यादा इंतज़ार करना पड़ सकता है। अगर इसे पिछली तारीख से लागू किया जाता है, तो योग्य कर्मचारियों को बीच के समय का एरियर मिल सकता है।