

8th Pay Commission Latest Update: केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बढ़ोतरी की चर्चाओं के बीच आज सोमवार को भुवनेश्वर में आठवें वेतन आयोग की बड़ी बैठक शुरू हो गई है। यह दो दिवसीय बैठक 7 जुलाई तक चलेगी। भुवनेश्वर के बाद आयोग की अगली बैठक 9 और 10 जुलाई को कोलकत्ता में होगी। नए वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट से मिली जानकारी के मुताबिक, सदस्य सचिव पंकज जैन सहित आयोग के अन्य सीनियर अधिकारी भाग ले रहे हैं।
इस बैठक में अलग-अलग विभागों के कर्चमारियों और उनके संगठनों के सुझाव और मांगों पर चर्चा होगी। इसी के आधार पर आठवां वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा और सरकार के सामने रखेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का सैलरी बढ़ोतरी की रास्ता निकलेगा।
आपको बताते चलें कि भुवनेश्वर में रही बैठक से पहले आयोग श्रीनगर और लखनऊ जैसे देश के अलग-अलग शहरों में कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर चुका है। देशव्यापी कंसल्टेशन के लिए आयोग विभिन्न कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगी संघों और अन्य हितधारकों के साथ बैठककर बातचीत कर रहा है। इन बैठकों में मिले फीडबैक से कई अहम मुद्दों पर सुझाव तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है, जिनमें न्यूनतम बेसिक पे, फिटमेंट फैक्टर, महंगाई भत्ता, पेंशन में बदलाव, भत्ते और नौकरी से जुड़ी दूसरी शर्तें शामिल हैं।
इस बहस के केंद्र में एक नंबर है- फिटमेंट फैक्टर। यह एक मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल नए वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी को बदलने के लिए किया जाता है। यह वह आधार बनाता है जिस पर सैलरी, पेंशन और कई अलाउंस को फिर से कैलकुलेट किया जाता है। सातवें वेतन आयोग के तहत, फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था, जिससे छठवां वेतन आयोग के तहत मिनिमम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर जनवरी 2016 से 18,000 रुपये हो गई।
आम धारणा के उलट, आयोग केवल नई सैलरी की घोषणा नहीं करता है। यह पहले मंत्रालयों, विभागों, कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगियों के संगठनों और विषय के जानकारों से राय लेता है। आयोग के सरकार के लिए अपनी सिफारिशें तैयार करने से पहले अलग-अलग शहरों में बैठक कर कर्मचारियों और उनके संगठनों से सुझाव ले रहा है।
आठवें वेतन आयोग को जनवरी 2025 में नोटिफाई किया गया था और शुरू में इसके 1 जनवरी, 2026 से लागू होने की उम्मीद थी, लेकिन इसके तुरंत लागू होने की उम्मीद कम है। पिछले पे कमीशन को सरकार की मंजूरी और रोलआउट से पहले अपनी रिपोर्ट जमा करने में आम तौर पर दो से तीन साल लगते थे। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को अपनी पे स्लिप में रिवाइज्ड सैलरी दिखने से पहले ज़्यादा इंतज़ार करना पड़ सकता है। अगर इसे पिछली तारीख से लागू किया जाता है, तो योग्य कर्मचारियों को बीच के समय का एरियर मिल सकता है।
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