बेसिक में DA मर्ज नहीं...फिर भी जीरो हो सकता है महंगाई भत्ता! 8वें वेतन आयोग में नया पे मैट्रिक्स?

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए वेतन आयोग में किस तरह सैलरी बढ़ेगी? महंगाई भत्ता कितना मिलेगा? और क्या इसे बेसिक में मर्ज कर दिया जाएगा?
8th Pay Commission latest update
आठवां वेतन आयोग, (डिजाइन फोटो/ नवभारत)
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DA Merger In 8th Pay Commission: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगले नए वेतन आयोग में किस तरह सैलरी बढ़ेगी? महंगाई भत्ता कितना मिलेगा? और क्या इसे बेसिक में मर्ज कर दिया जाएगा? बीते कुछ हफ्तों से DA मर्जर की चर्चा तेज थी, लेकिन सरकार ने हाल ही में संसद में साफ कर दिया कि किसी तरह का “मर्जर” नहीं होगा।

लेकिन यह सुनकर घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि एक सच यह भी है कि DA फिर भी शून्य हो सकता है और यह पूरी तरह 7वें वेतन आयोग की प्रक्रिया जैसा ही होगा।अब सवाल यह है कि अगर DA मर्ज नहीं होगा, तो शून्य कैसे होगा? सैलरी का नया स्ट्रक्चर कैसे बनेगा? बेसिक कैसे बढ़ेगी? और कर्मचारियों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

मर्जर और एडजस्टमेंट में बड़ा फर्क

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कर्मचारी क्या मांग रहे थे और सरकार ने क्या मना किया। लोग अक्सर दोनों को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि असल में दोनों अलग हैं।

  • “मर्जर” (Merger) का मतलब DA के किसी निश्चित हिस्से- जैसे 50% को स्थायी रूप से Basic Pay का हिस्सा बना देना→ जैसा कि 5वें और 6वें वेतन आयोग में हुआ था।
  • “एडजस्टमेंट” (Adjustment) का मतलब Basic + DA को जोड़कर एक नई बेसिक तैयार करना और फिर DA को 0% से शुरू करना→ जैसा कि 7वां वेतन आयोग में किया गया था।

7वें वेतन आयोग में मर्जर की जगह एडजस्टमेंट

7वें वेतन आयोग ने 'मर्जर' की जगह 'समायोजन' यानी एडजस्टमेंट का रास्ता अपनाया था। इसमें DA को बीच में बेसिक में नहीं जोड़ा जाता। बल्कि, जब नया वेतन आयोग लागू होता है, तब पिछले सारे DA को, बेसिक सैलरी को और महंगाई के असर को एक साथ मिलाकर एक 'नया वेतन मैट्रिक्स' (New Pay Matrix) तैयार किया जाता है। इसमें DA तकनीकी रूप से बेसिक में समा जाता है, लेकिन इसे 'मर्जर' का नाम नहीं दिया जाता। इसी वजह से सरकार कहती है- “मर्जर नहीं होगा।” लेकिन असल में DA खत्म होकर नए Basic में शामिल हो जाता है। 8वें वेतन आयोग में क्या होगा, यह समझने के लिए हमें 2016 में लागू हुए 7वें वेतन आयोग (7th CPC) के मॉडल को देखना होगा। उस समय सरकार ने एक बहुत ही स्मार्ट कैलकुलेशन का इस्तेमाल किया था। उस वक्त 6वें वेतन आयोग के हिसाब से कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 125% तक पहुंच चुका था।

इन 5 स्टेप्स से फिक्स हुई थी सैलरी

  • स्टेप 1: कर्मचारी का पुराना बेसिक पे (6th CPC वाला) लिया गया।
  • स्टेप 2: उस तारीख तक जमा हुआ 125% महंगाई भत्ता कैलकुलेट किया गया।
  • स्टेप 3: इन दोनों को एक खास नंबर से गुणा किया गया, जिसे 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) कहा गया। (7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था)।
  • स्टेप 4: जो रकम निकलकर आई, वह कर्मचारी की 'नई बेसिक सैलरी' बन गई।
  • स्टेप 5: सबसे बड़ा बदलाव- जैसे ही नई बेसिक सैलरी लागू हुई, महंगाई भत्ता (DA) 0% कर दिया गया।

यानी, वो 125% DA गायब नहीं हुआ, बल्कि वह आपकी नई बढ़ी हुई बेसिक सैलरी का हिस्सा बन गया। इसे ही 'एडजस्टमेंट' कहते हैं। तकनीकी रूप से DA “मर्ज” नहीं हुआ, लेकिन व्यावहारिक रूप से DA बेसिक में समाहित (adjusted) हो गया।

क्या फिर से 'जीरो' होगा DA?

अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर- भविष्य में क्या होगा? भले ही अभी सरकार ने 50% पर DA मर्ज करने से मना कर दिया हो, लेकिन जब 8वां वेतन आयोग आएगा, तो पूरी संभावना है कि वह 7वें वेतन आयोग के ही मॉडल को फॉलो करेगा। सरकार का आयोग इस पर काम कर रहा है, सिफारिशें आने में वक्त लगेगा। लेकिन, यह लगभग तय है कि फार्मूला 7वें CPC जैसा ही हो सकता है।

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