आधार कार्ड को मिला नया दर्जा, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला
Election Commission ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करते हुए मंगलवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश जारी किया। SIR की प्रक्रिया के बाद आधार की पहचान प्रमाणिकता को लेकर निर्देशित किया।
- Written By: सौरभ शर्मा
चुनाव आयोग
Election Commission of India: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में आधार कार्ड को 12वें दस्तावेज के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि आधार को नागरिकता के सबूत के रूप में नहीं, बल्कि केवल पहचान के प्रमाण के तौर पर स्वीकार किया जाएगा। बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को जारी आदेश में कहा गया है कि इस निर्देश का पालन अनिवार्य है और उल्लंघन को गंभीर माना जाएगा।
चुनाव आयोग ने अपने पत्र में कहा कि आधार कार्ड को पहचान स्थापित करने के लिए पहले से ही जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 23(4) के तहत मान्यता प्राप्त है। आयोग ने जोर देकर कहा कि अब 11 दस्तावेजों की सूची में आधार को 12वें दस्तावेज के रूप में जोड़ा जाएगा। इस आदेश के तहत बिहार में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान में आधार कार्ड को स्वीकार करना जरूरी होगा। आयोग ने सभी जिला चुनाव अधिकारियों और ईआरओ को भी इसका पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बदलाव
24 जून को चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट की जांच के लिए 11 दस्तावेजों की सूची जारी की थी, जिनमें जाति प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट और शैक्षणिक प्रमाणपत्र शामिल थे। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जिसके बाद कोर्ट ने 10 जुलाई को आयोग से आधार, राशन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र को भी शामिल करने पर विचार करने को कहा। आयोग ने जवाब में कहा कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है। इसके बावजूद कोर्ट ने आदेश दिया कि आधार को पहचान के लिए स्वीकार किया जाए।
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बिहार से शुरू हुआ नया प्रयोग
चुनाव आयोग ने पूरे देश में विशेष पुनरीक्षण अभियान चलाने का फैसला लिया है, जिसकी शुरुआत बिहार से की गई। यहां सभी पंजीकृत वोटर्स को 1 अगस्त के ड्राफ्ट रोल में शामिल होने के लिए 25 जुलाई तक नए फॉर्म जमा करने की समयसीमा दी गई थी। 2003 के बाद वोटर लिस्ट में शामिल होने वालों को आयोग द्वारा बताए गए दस्तावेजों में से पात्रता प्रमाण देना अनिवार्य था। वहीं, 1 जुलाई 1987 के बाद जन्मे लोगों को अपने माता-पिता की जन्मतिथि या जन्मस्थान के दस्तावेज भी देने थे। इस प्रक्रिया में कुल 7.89 करोड़ वोटर्स में से 7.24 करोड़ मतदाता ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल हो गए।
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चुनाव आयोग ने साफ चेतावनी दी है कि यदि किसी भी अधिकारी ने आधार कार्ड को पहचान के सबूत के रूप में मानने से इंकार किया, तो इसे गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और आयोग के निर्देश से यह स्पष्ट हो गया है कि अब वोटर लिस्ट पुनरीक्षण प्रक्रिया में आधार कार्ड की भूमिका और भी अहम हो गई है।
