शहीद शुभम केस में नया मोड़! 21 लाख के चेक पर बवाल के बाद परिवार को मिली 1.5 करोड़ की सहायता

Flight Lieutenant Shubham Martyr: बलिदानी फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम के परिवार को सैनिक कल्याण बोर्ड से 1.5 करोड़ रुपये की सहायता राशि मिली है, जबकि गांव में उनकी याद में स्मारक बनाने की मांग उठ रही है।
Story Behind Martyr Shubham Case amily Receives 1.5 Crore rupees
शहीद शुभम और उनकी पत्नी (डिजाइन फोटो)
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Martyr Shubham Family 1.5 Crore Compensation: वायुसेना के फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी शहादत के बाद शुरू हुआ एक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। जिस घर में बेटे की वीरगाथा सुनाई जानी चाहिए थी, वहां अब मुआवजे, रिश्तों और अधिकारों को लेकर सवालों का शोर सुनाई दे रहा है। अंतिम संस्कार के दौरान उनकी पत्नी को 21 लाख रुपये का चेक लेकर भाग जाने की बात कही गई। वहीं, अब जाकर सैनिक कल्याण बोर्ड ने शुभम के परिवार को 1.5 करोड़ रुपये की सहायता राशि सौंपी है।

परिवार को मिली 1.5 करोड़ की सहायता

देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम के परिवार को सैनिक कल्याण बोर्ड की ओर से 1.5 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष संदीप तिवारी ने 20 जून को यह चेक शुभम के परिजनों को सौंपा। इस दौरान बैंक अधिकारियों को भी आवश्यक प्रक्रियाएं घर पहुंचकर पूरी कराने के निर्देश दिए गए। इससे पहले शुभम के अंतिम संस्कार के दौरान प्रशासन की ओर से उनकी पत्नी श्रेया राय को 21 लाख रुपये की सहायता राशि का चेक सौंपा गया था, जिसे लेकर काफी चर्चा हुई थी।

शहादत के 10 दिन बाद भी गम में डूबा है गांव

बिहार के जहानाबाद स्थित हुलासगंज प्रखंड के बनवरिया गांव में आज भी शोक का माहौल है। शुभम की शहादत को 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन परिवार और ग्रामीण अब भी इस दुख से उबर नहीं पाए हैं। गांव के लोग उनके मिलनसार स्वभाव, सरल व्यक्तित्व और देशभक्ति को याद कर भावुक हो जाते हैं।

गांव में स्मारक बनाने की मांग तेज

शुभम की शहादत के बाद ग्रामीणों ने उनकी स्मृति में गांव में एक शहीद स्मारक या प्रवेश द्वार बनाने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे आने वाली पीढ़ियां उनके साहस, देशभक्ति और बलिदान से प्रेरणा ले सकेंगी।

ग्रामीणों का मानना है कि फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम ने अपने बलिदान से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। लोगों ने सरकार और जनप्रतिनिधियों से उनकी स्मृति को स्थायी रूप देने की अपील की है।

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