भरत तिवारी एनकाउंटर पर क्यों उठ रहे सवाल? जानिए क्या कहते हैं कानून और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस

Encounter Guidelines: भरत तिवारी एनकाउंटर की न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं। ऐसे में सवाल ये है कि क्या पुलिस को किसी की जान लेने का अधिकार है? भरत ने पिस्टल फेंक दी थी तो उसे गोलियां क्यों मारी गईं?
Controversy On Bharat Bhushan Tiwari Case Supreme Court guidelines for Encounter
एनकाउंटर में मारा गया भरत भूषण तिवारी (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Supreme Court Encounter Guidelines: बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 18 जून को हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि भरत ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसे गोली मारी गई। मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जा चुका है और राज्य सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। इस घटना के बाद एक बार फिर पुलिस एनकाउंटर के कानूनी प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों पर चर्चा तेज हो गई है।

पुलिस का दावा है कि भरत ने कार्रवाई के दौरान फायरिंग की थी, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में गोली चलाई गई। वहीं वायरल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर परिजन आरोप लगा रहे हैं कि भरत ने अपनी पिस्टल पुलिस की ओर फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उन्हें गोली मारी गई।

क्या पुलिस को किसी की जान लेने का अधिकार है?

भारतीय कानून पुलिस को सीधे तौर पर एनकाउंटर करने या किसी आरोपी की हत्या करने का अधिकार नहीं देता। हालांकि, कुछ परिस्थितियों में बल प्रयोग की अनुमति जरूर दी गई है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 96 के तहत आत्मरक्षा में किया गया कार्य अपराध नहीं माना जाता। यदि किसी पुलिसकर्मी या नागरिक की जान पर खतरा हो तो वह आवश्यक बल का प्रयोग कर सकता है।

सरकारी कर्तव्य के दौरान सुरक्षा

IPC की धारा 300 के अपवादों के अनुसार, यदि कोई सरकारी कर्मचारी कानून के तहत अपना कर्तव्य निभाते हुए कार्रवाई करता है और उसमें किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो विशेष परिस्थितियों में उसे कानूनी संरक्षण मिल सकता है।

Supreme Court guidelines on encounter cases
एनकाउंटर मामलों में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस (सोर्स-AI)

गिरफ्तारी के दौरान बल प्रयोग

दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा 46 पुलिस को गिरफ्तारी का विरोध करने या भागने की कोशिश करने वाले व्यक्ति के खिलाफ आवश्यक बल प्रयोग की अनुमति देती है, लेकिन इसे किसी को मारने का खुला अधिकार नहीं माना जाता।

पुलिस मुठभेड़ों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी

साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) की याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस मुठभेड़ों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्र जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है और राज्य भी इसका मनमाने तरीके से उल्लंघन नहीं कर सकता है।

भरत तिवारी मामले में क्यों बढ़ा विवाद?

विवाद की सबसे बड़ी वजह वह वीडियो है जिसमें भरत तिवारी के कथित तौर पर हथियार छोड़ने और आत्मसमर्पण करने का दावा किया जा रहा है। यदि जांच में यह साबित होता है कि उन्होंने सरेंडर कर दिया था और इसके बाद भी बल प्रयोग किया गया, तो मामला सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस और मानवाधिकार मानकों के उल्लंघन से जुड़ सकता है। इसी कारण राज्य सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच पर जोर दिया जा रहा है।

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