बिहार विधानसभा चुनाव में जोर आजमाइश करेंगे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, सभी सीटों पर लड़ेंगे चुनाव

Bihar की राजनीति में बड़ी हलचल हो सकती है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ऐलान किया है कि उनका संगठन आगामी विधानसभा चुनाव में राज्य की सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगा।
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, फोटो- सोशल मीडिया
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Swami Avimukteshwaranand on Bihar Election: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बिहार चुनाव में सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारने की घोषणा की है। गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने, गौ हत्या पर सख्त सजा और भारत-नेपाल में राजतंत्र बहाल करने की मांग को दोहराया। सनातन पदयात्रा को भी समर्थन दिया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ माता की रक्षा, हिंदू एकता और राजतंत्र की बहाली जैसे मुद्दों को अपनी प्राथमिकता बताया है।

बांका जिले के मदुसूदन मंदिर बौसी में आयोजित एक सभा के दौरान शंकराचार्य ने कहा कि वे अब केवल प्रवचन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सीधे राजनीति में उतरेंगे। उन्होंने कहा कि उनका संगठन बिहार विधानसभा की सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारेगा ताकि धर्म और राष्ट्र दोनों की रक्षा की जा सके।

गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अब समय आ गया है जब गौ माता को केवल श्रद्धा की दृष्टि से नहीं बल्कि राष्ट्रमाता का दर्जा देकर कानूनी रूप से उनकी रक्षा की जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान सरकारें उन लोगों से चंदा लेती हैं जो गौ हत्या में शामिल हैं।

लोकतंत्र नहीं, चाहिए राजतंत्र

उन्होंने भारत और नेपाल दोनों में राजतंत्र की वकालत की। उनका कहना था कि जब नेपाल में राजशाही थी, तब वहां की व्यवस्था बेहतर थी। उन्होंने कहा कि चीन के समर्थन से वहां लोकतंत्र लाया गया, जिससे असंतोष बढ़ा है। भारत में भी उन्होंने राजतंत्र को एक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में पेश किया।

100 करोड़ हिंदुओं की अनदेखी का आरोप

वाराणसी में दिए एक बयान में उन्होंने कहा कि भारत में 100 करोड़ से अधिक सनातन हिंदू हैं, फिर भी उनकी समस्याओं की अनदेखी होती है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों के लिए योजनाएं बनती हैं, लेकिन बहुसंख्यकों के अधिकारों की बात करना सांप्रदायिकता मान ली जाती है।

सनातन हिंदू एकता पदयात्रा को समर्थन

धीरेंद्र शास्त्री की सनातन हिंदू एकता पदयात्रा को उन्होंने पूर्ण समर्थन दिया और कथावाचकों पर नियंत्रण की मांग करते हुए कहा कि शंकराचार्यों को धार्मिक मामलों में फिर से अधिकार मिलने चाहिए। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या यह चुनाव प्रचार का हिस्सा है, तो उन्होंने स्पष्ट कहा, “गौ माता कट रही हैं, लेकिन हिंदू नहीं कट रहा।”

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