नीतीश की नाराजगी का रिस्क नहीं लेगी BJP, नया CM चुनने के लिए क्यों जरूरी हैं नीतीश कुमार? Inside Story

Nitish Kumar: नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर आने के बाद जदयू कार्यकर्ता अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि एनडीए ने वोट नीतीश कुमार के चेहरे पर मांगा था।
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Bihar Politics: बिहार में जैसे ही नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया, राज्य की राजनीति में अचानक बड़ा मोड़ आ गया है। जेडीयू के जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए यह स्थिति समझना और स्वीकार करना आसान नहीं है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं। पार्टी के कई कार्यकर्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि एनडीए ने चुनाव के दौरान वोट नीतीश कुमार के चेहरे पर मांगे थे, लेकिन अब केवल तीन महीने बाद ही उनसे राज्यसभा का नामांकन भरवा दिया गया।

जेडीयू के कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि वे जो कुछ सुन या देख रहे हैं, वह ज्यादातर मीडिया के माध्यम से ही है। पार्टी की ओर से उन्हें इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

अभी नीतीश कुमार नहीं देंगे इस्तीफा

उधर बीजेपी को इस असंतोष का अंदाजा है। इसलिए पार्टी की रणनीति फिलहाल इस प्रक्रिया को तेज़ी से आगे बढ़ाने की नहीं, बल्कि धीरे-धीरे आगे बढ़ाने की बताई जा रही है। पटना से आ रही खबरों के अनुसार, नीतीश कुमार को तुरंत मुख्यमंत्री पद से नहीं हटाया जाएगा। माना जा रहा है कि बीजेपी इस फैसले में एक-दो महीने का समय ले सकती है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी बिहार में होने वाले विधान परिषद चुनाव का इंतजार कर सकती है। चर्चा है कि इस चुनाव में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार उम्मीदवार हो सकते हैं। यदि निशांत विधायक बन जाते हैं तो उनके लिए उपमुख्यमंत्री बनने का रास्ता भी खुल सकता है, और माना जा रहा है कि नीतीश कुमार यह सब अपने मुख्यमंत्री रहते हुए ही पूरा करना चाहते हैं।

क्यों जरूरी हैं नीतीश?

इसके साथ ही बीजेपी ने यह संकेत भी दिया है कि बिहार के अगले मुख्यमंत्री के चयन में नीतीश कुमार की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। बीजेपी किसी भी स्थिति में उनके अति पिछड़ा वोट बैंक को खोना नहीं चाहेगी, इसलिए मुख्यमंत्री के चेहरे पर फैसला सोच-समझकर लिया जाएगा। बीजेपी ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे राज्यों में कई बार ऐसे नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया है जिनके नाम पहले चर्चा में भी नहीं थे। यही स्थिति बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन के समय भी देखने को मिली थी, जब नीतिन नवीन को यह जिम्मेदारी दी गई थी।

नए नेता को चुनने की चुनौती

हालांकि बिहार की स्थिति अलग है, क्योंकि यहां गठबंधन की सरकार है और सभी सहयोगियों को साथ लेकर चलना जरूरी है, खासकर नीतीश कुमार और जेडीयू को। सबसे बड़ी चुनौती यह भी होगी कि मुख्यमंत्री के चेहरे को तय करते समय जातीय समीकरणों को कैसे संतुलित किया जाए। यदि एक कुर्मी मुख्यमंत्री को हटाया जाता है तो उसकी जगह किसे लाया जाए, यह बीजेपी के सामने बड़ा सवाल होगा।

यही वह बिंदु है जहां नीतीश कुमार का अनुभव बीजेपी के लिए अहम साबित हो सकता है। इसलिए माना जा रहा है कि सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह से तय होने तक बीजेपी नीतीश कुमार को संतुष्ट और सहयोगी बनाए रखना चाहेगी।

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