हरनौत विधानसभा: JDU की लगातार 8 बार जीत का रिकॉर्ड, प्रशांत किशोर और कांग्रेस क्या तोड़ पाएंगे गढ़?

Bihar Assembly Elections: हरनौत विधानसभा सीट (नालंदा) नीतीश कुमार का गृह क्षेत्र और JDU का मजबूत गढ़ है। हरि नारायण सिंह (JDU) को प्रशांत किशोर की जन सुराज और कांग्रेस से चुनौती मिलेगी।
Harnaut Assembly: JDU's record of winning 8 times in a row, will Prashant Kishor and Congress be able to break the stronghold?
हरनौत विधानसभा: (कॉन्सेप्ट फोटो)
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Harnaut Assembly Constituency: बिहार के नालंदा जिले का हरनौत विधानसभा क्षेत्र (Harnaut Assembly Seat) अपनी उपजाऊ भूमि, रेलवे कैरेज रिपेयर वर्कशॉप और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह क्षेत्र होने के कारण राज्य की राजनीति में एक विशिष्ट स्थान रखता है।

यह सीट दशकों से जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) का अभेद्य गढ़ रही है, लेकिन आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में प्रशांत किशोर की पार्टी 'जन सुराज' और कांग्रेस की सक्रियता से मुकाबला काफी दिलचस्प होने की संभावना है।

जदयू का मजबूत किला: नीतीश कुमार का प्रभाव

हरनौत सीट नालंदा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पैतृक गांव कल्याण बिगहा इसी विधानसभा क्षेत्र में स्थित है।

JDU का रिकॉर्ड: 1970 के दशक में अस्तित्व में आई इस सीट पर 1977 और 1980 के चुनावों को छोड़कर 8 विधानसभा चुनावों में जदयू/जनता दल की ही जीत रही है। यह रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से क्षेत्र पर JDU के मजबूत प्रभाव को दर्शाता है।

वर्तमान स्थिति: 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू के हरि नारायण सिंह ने जीत दर्ज की।

आर्थिक आधार: यहाँ की कृषि, रेलवे फैक्ट्री (जो स्थानीय रोजगार देती है) और पर्यटन तीन प्रमुख आर्थिक स्तंभ हैं, जिन पर JDU का विकास का दावा टिका हुआ है।

निर्णायक जातीय समीकरण और नई चुनौती

समुदाय भूमिका राजनीतिक रुझानकुर्मी निर्णायक:नीतीश कुमार का कोर वोट बैंक, JDU के लिए सबसे मजबूत आधार।

पासवान महत्वपूर्ण: मुख्य रूप से लोजपा या दलित केंद्रित दलों से जुड़े, अब 'जन सुराज' के लिए महत्वपूर्ण।

यादव महत्वपूर्ण: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का पारंपरिक वोट बैंक।

वहीं, अगर राजपूत, भूमिहार, रविदास भी चुनावी परिणामों को प्रभावित करते हैं।

2025 की चुनौती: जन सुराज की एंट्री

इस बार का चुनाव हरि नारायण सिंह (JDU) के लिए आसान नहीं रहने वाला है।

जन सुराज की चुनौती: प्रशांत किशोर की पार्टी 'जन सुराज' ने पासवान समाज से कमलेश पासवान को उम्मीदवार बनाया है, जिनकी स्थानीय राजनीति में अच्छी पकड़ है। दलित वोटरों में सेंध लगाने की यह कोशिश JDU और कांग्रेस दोनों के लिए चुनौती पेश करेगी।

कांग्रेस की दावेदारी: कांग्रेस ने अरुण कुमार बिंद को उम्मीदवार बनाकर अपनी दावेदारी पेश की है।

त्रिकोणीय संघर्ष: इस सीट पर JDU की जीत की संभावनाएँ मुख्य रूप से कुर्मी वोटों की एकजुटता और विपक्षी वोटों के बंटवारे पर निर्भर करेंगी, जबकि कांग्रेस और जन सुराज अपनी-अपनी जातीय पकड़ के सहारे मुकाबले को रोमांचक बनाने की कोशिश करेंगे।

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