बिहार में इस समय चुनावी हलचल जोरों पर है जहां सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी तैयारियों में जुटी हैं। इस साल के अंत तक राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावी तारीख की घोषणा से पहले ही राज्य में चुनावी राजनीति गरमा गई है। बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें है जिसमें से एक सासाराम भी है।
सासाराम में राजनीतिक दलों की तरफ से कई चुनावी कार्यक्रम किए जा रहे हैं। यहां संभावित उम्मीदवार अपनी संभावनाएं तलाश रहा है। सासाराम के इतिहास की बात करें तो यह काफी गौरवशाली रहा है। पहले के समय में सासाराम सूर्यवंश की राजधानी हुआ करता था। वर्तमान में यह बिहार की जनरल सीट है।
सासाराम विधानसभा सीट पर चुनावों में जातीय समीकरण अहम भूमिका निभाता नजर आता है। यहां जातीय समीकरण, दलों की रणनीति और उम्मीदवारों की छवि मिलकर परिणाम तय करती है। यहां पर कुशवाहा, राजपूत, ब्राह्मण और दलित समुदायों की आबादी ज्यादा है। जिसमें से कुशवाहा समुदाय इस क्षेत्र में चुनावी समीकरण तय करने में अहम भूमिका निभाता है।
बिहार में 1957 में निर्वाचन क्षेत्र बनने के बाद सासाराम में अब तक करीब 17 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। चुनावी आंकड़ों की बात करें सबसे ज्यादा सासाराम में बीजेपी ने जीत दर्ज की है। इस सीट पर कांग्रेस को सिर्फ दो बार जीत मिली है। हाल के कुछ सालों में यह सीट बीजेपी और आरजेडी के लिए महत्वपूर्ण रही है।
बिहार की महत्वपूर्ण सीट सासाराम पर पिछले चुनाव 2020 में आरजेडी ने जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में आरजेडी के राजेश कुमार गुप्ता ने जेडीयू के अशोक कुमार को 26423 मतों के अंतर से हराया था। लोकसभा चुनाव की बात करें तो इस सीट पर कांग्रेस ने चुनाव जीता था।
साल 2020 और 2015 विधानसभा चुनाव में सासाराम सीट पर आरजेडी ने जीत दर्ज की। वहीं, 2010 और 2005 के चुनाव में बीजेपी ने इस सीट पर कब्जा किया। सासाराम पर आरजेडी का कब्जा रहा हो लेकिन आंकड़ों की मानें तो इस सीट पर बीजेपी का पलड़ा भारी रहा है। इस बार बिहार में प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी चुनावी मैदान में है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि इस सीट पर जनता किसे चुनती है।