बिहार में बिना JDU के बनेगी सरकार…मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे नीतीश कुमार? इसलिए मच गई है सियासी खलबली
Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने कुल 101 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे 95 पर जीत हासिल होती हुई दिख रही है। इस आंकड़े के साथ बीजेपी बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।
- Written By: अभिषेक सिंह
कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
Bihar Election Result: बिहार में विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सारे एग्जिट पोल्स को फेल कर दिया है। कुल 15 से 17 सर्वे सामने आए थे, जिनमें से एक पोल डायरी ने ही एनडीए को 184 से 206 तक सीटें मिलने की भविष्यवाणी की थी। अब आंकड़ा 207 पहुंच गया है तो इस एग्जिट पोल की चर्चा हो रही है। इस बीच बीजेपी का प्रदर्शन भी चर्चा में है।
इस बार बीजेपी ने कुल 101 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 95 पर जीत हासिल होती हुई दिख रही है। इस आंकड़े के साथ बीजेपी बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वह 2010 में भी इतनी ही ज्यादा सीटें नहीं जीत पाई थी। लेकिन तब सबसे बड़ी पार्टी जेडीयू थी। इस बार मामला अलग है। जिससे सियासी खलबली मची हुई है।
इस बार बदल गए हैं समीकरण
नीतीश की जेडीयू ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन 84 सीटें लेकर भाजपा से 11 सीट पीछे है। इस तरह भाजपा की स्थिति ऐसी बन रही है कि उसके लिए जेडीयू के बिना भी बिहार की सत्ता में पहुंचने के रास्ते खुल रहे हैं। यह रास्ता चिराग पासवान की लोजपा-आर, जीतनराम मांझी की HAM और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोकमोर्चा को साथ लेकर बनता हुआ दिख रहा है।
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जेडीयू के बिना बनेगी सरकार?
दरअसल बिहार विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 122 है। अब अकेले भाजपा के पास 95 है तो खुद को पीएम मोदी का हनुमान कहने वाले चिराग पासवान के पास भी 19 सीटें हैं। दोनों मिलकर 114 हो जाते हैं। फिर HAM की 5 और RLM की 4 सीटों को मिलाकर 123 का आंकड़ा पूरा हो जाता है।
यानी भारतीय जनता पार्टी बिना नीतीश कुमार की जेडीयू के भी जादूई आंकड़ छू सकती है। हालांकि, यह सिर्फ एक विकल्प है और भाजपा शायद ही ऐसा करना चाहेगी। क्योंकि केन्द्र में मजबूती के लिए नीतीश कुमार जरूरी हैं। साथ ही भाजपा ने उन्हें सीएम फेस घोषित किया हुआ था।
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वहीं, केन्द्र में 12 सीटों वाली जेडीयू मोदी सरकार की मजबूती के लिहाज से जरूरी है। साथ ही नीतीश अब भी बिहार में एक फैक्टर हैं। दूसरी तरफ बिहार में नीतीश के सीएम बने रहने के लिए भाजपा आवश्यक हो गई है। इसलिए उनके सामने पलटी मारने का विकल्प लगभग समाप्त हो गया है। तो भाजपा के लिए उन्हें सीएम बनाए रखना भी लाजमी है।
