

Indian Railway Kavach System: भारत में रेलवे अपनी सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों को और सुरक्षित बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। जिसमें अब वंदे भारत ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलने लगी हैं ऐसे में तेज गति पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी हो गया है। जिसको देखते हुए रेलवे ने अपने स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम कवच को अपग्रेड कर दिया है। वहीं अब इसके नए वर्जन में कवच 4.0 हाई-स्पीड ट्रेनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
कवच भारतीय रेलवे के बारे में बताए तो यह स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम है। बता दें कि इसे रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) ने भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर विकसित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य मानवीय गलती से होने वाले ट्रेन हादसों को रोकना है। वहीं इसमें खास तौर पर अगर ड्राइवर गलती से खतरे वाले सिग्नल को पार करने वाला हो या ट्रेन निर्धारित गति सीमा से ज्यादा तेज दौड़ रही हो तो कवच हस्तक्षेप कर सकता है। जिसका सीधा मतलब है कि किसी आपात स्थिति में सिर्फ ड्राइवर की प्रतिक्रिया पर निर्भर रहने के बजाय सिस्टम खुद सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल सकता है।
जानकारी के लिए बता दें कि कवच ट्रेन, ट्रैक और सिग्नल के बीच लगातार डिजिटल कम्युनिकेशन बनाए रखता है। अगर ट्रेन जरूरत से ज्यादा स्पीड में चल रही है और ड्राइवर समय पर ब्रेक नहीं लगाता तो सिस्टम स्थिति का आकलन करके ऑटोमैटिक ब्रेकिंग शुरू कर सकता है। वहीं 160 किलोमीटर प्रति घंटे जैसी रफ्तार पर यह क्षमता बेहद अहम हो जाती है क्योंकि तेज गति में ड्राइवर को प्रतिक्रिया देने के लिए मिलने वाला समय काफी कम होता है। ऐसे में तकनीकी सिस्टम की मदद दुर्घटना के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इसके साथ ही कवच को काम करने के लिए रेलवे ट्रैक पर RFID टैग, टेलीकॉम टावर, ऑप्टिकल फाइबर और अन्य संचार उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे ट्रेन में मौजूद उपकरण रेडियो कम्युनिकेशन के जरिए ट्रैक और सिग्नल सिस्टम से जानकारी प्राप्त कर सकते है। वहीं इससे ट्रेन की स्थिति, गति और आगे मौजूद खतरे के बारे में सिस्टम को जानकारी मिलती रहती है। जरूरत पड़ने पर यह टक्कर की आशंका को पहचानकर कार्रवाई कर सकता है। यही तकनीक आमने-सामने की टक्कर और पीछे से होने वाली टक्कर के जोखिम को कम करने में मदद करती है।
कवच को Safety Integrity Level-4 (SIL-4) मानक के अनुरूप विकसित किया गया है जिसे सुरक्षा प्रणालियों के सबसे ऊंचे स्तरों में गिना जाता है। सिस्टम का उद्देश्य न केवल ट्रेन को सुरक्षित रखना है बल्कि रेलवे कंट्रोल रूम को ट्रेन की स्थिति और गति की निगरानी में भी मदद करना है। वहीं वंदे भारत जैसी तेज रफ्तार ट्रेनों के विस्तार के साथ कवच 4.0 रेलवे के सुरक्षा ढांचे के लिए अहम तकनीक साबित हो सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यही है कि आपात स्थिति में इंसानी गलती के बाद भी सिस्टम ट्रेन को संभालने की कोशिश करता है जिससे यात्रियों की सुरक्षा का एक अतिरिक्त स्तर तैयार होता है।