

Car Modification Rules: कार को ज्यादा स्टाइलिश और अलग दिखाने के लिए आफ्टरमार्केट मॉडिफिकेशन का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। बता दें बड़े अलॉय व्हील, स्पोर्टी बॉडी किट, लाउड एग्जॉस्ट या डार्क विंडो फिल्म कार का लुक जरूर बदल देते हैं लेकिन हर बदलाव सड़क पर इस्तेमाल के लिए कानूनी नहीं होता। कुछ मॉडिफिकेशन वाहन की सुरक्षा और मूल संरचना को प्रभावित कर सकते हैं और ऐसे मामलों में चालान या अन्य कानूनी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए कार को कस्टमाइज कराने से पहले नियम जानना बेहद जरूरी है।
कार के टायर अपग्रेड किए जा सकते हैं लेकिन नए टायर निर्माता की तय स्पेसिफिकेशन के अनुरूप होने चाहिए। लोड इंडेक्स और स्पीड रेटिंग भी कार के हिसाब से सही होना जरूरी है। इसी तरह सस्पेंशन में बदलाव संभव है लेकिन इससे वाहन का ग्राउंड क्लीयरेंस बहुत ज्यादा बढ़ाना या घटाना ठीक नहीं है। बदलाव ऐसा होना चाहिए जिससे कार की हैंडलिंग और सेफ्टी प्रभावित न हो।
लुक बदलने के लिए फ्रंट स्प्लिटर, बॉडी क्लैडिंग और साइड पैनल जैसी बॉडी किट लगाई जा सकती हैं बशर्ते कार के मूल स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव न किया जाए। विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए LED DRLs भी लगाए जा सकते हैं। अगर कार का रंग बदलना चाहते हैं तो सावधानी जरूरी है। इसके लिए RTO की अनुमति लेनी पड़ सकती है और बदलाव के बाद RC में जानकारी अपडेट करानी होती है। वहीं Vinyl या Body Wrap से फैक्ट्री पेंट को सुरक्षित रखते हुए लुक बदला जा सकता है। Aftermarket CNG Kit भी लगाई जा सकती है लेकिन फिटमेंट के बाद RTO में इसे दर्ज कराना जरूरी है।
बहुत तेज आवाज वाले या प्रेशर हॉर्न से परेशानी हो सकती है। इसी तरह जरूरत से ज्यादा बड़े अलॉय व्हील या निर्माता की तय सीमा से बाहर के व्हील भी समस्या पैदा कर सकते हैं। कार की खिड़कियों पर बहुत डार्क टिंट फिल्म लगाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि शीशों में निर्धारित विजिबिलिटी बनाए रखना जरूरी है। लाउड आफ्टरमार्केट एग्जॉस्ट ध्वनि प्रदूषण बढ़ाने के साथ PUC से जुड़ी परेशानी भी खड़ी कर सकता है। वहीं फैंसी या डिजाइनर नंबर प्लेट की जगह निर्धारित फॉर्मेट वाली नंबर प्लेट का इस्तेमाल करना जरूरी है।
कार को मॉडिफाई कराना पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन बदलाव की सीमा, सुरक्षा और कानूनी स्थिति सबसे महत्वपूर्ण है। ऐसा कोई परिवर्तन न करें जिससे वाहन का मूल स्ट्रक्चर, प्रदूषण नियंत्रण या सड़क पर दूसरे लोगों की सुरक्षा प्रभावित हो। खासकर रंग, इंजन या CNG जैसे बदलाव कराने से पहले RTO के नियमों की पुष्टि करना बेहतर है। गलत मॉडिफिकेशन सिर्फ चालान ही नहीं बल्कि RC, वारंटी और वाहन की सुरक्षा से जुड़ी परेशानी भी पैदा कर सकता है।