भारत-पाक तनाव के बीच ब्लैकआउट सायरन बजने पर कैसे करें सुरक्षित ड्राइविंग? जानें ज़रूरी गाइडलाइन
ऐसे संवेदनशील इलाकों में भारत सरकार ने नागरिकों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। बीते कुछ दिनों से कई क्षेत्रों में ब्लैकआउट की प्रक्रिया अपनाई जा रही है ताकि किसी संभावित खतरे से समय रहते बचाव हो सके।
- Written By: सिमरन सिंह
Blackout के समय इन बातों को ध्यान में रखें गाड़ी चलाने वाले। (सौ. X)
नवभारत ऑटो डेस्क: भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए अलर्ट मोड पर आना बेहद जरूरी हो गया है। ऐसे संवेदनशील इलाकों में भारत सरकार ने नागरिकों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। बीते कुछ दिनों से कई क्षेत्रों में ब्लैकआउट की प्रक्रिया अपनाई जा रही है ताकि किसी संभावित खतरे से समय रहते बचाव हो सके।
ब्लैकआउट सायरन का क्या है मतलब?
ब्लैकआउट सायरन बजने का सीधा संकेत है कि किसी आपातकालीन स्थिति जैसे हवाई हमला, युद्ध या गंभीर खतरे की आशंका है। इसका मुख्य उद्देश्य होता है कि सभी लाइटें बंद कर दी जाएं ताकि दुश्मन की निगाह लक्ष्यों पर न पहुंचे। “ब्लैकआउट का मकसद है दुश्मन को भ्रमित करना, यह जरूरी नहीं कि हर बार हमला हो।” – रक्षा मंत्रालय सूत्र
अगर आप ड्राइव कर रहे हों तो क्या करें?
- जैसे ही ब्लैकआउट का सायरन बजे, शांत रहें और घबराएं नहीं।
- वाहन को तुरंत सुरक्षित स्थान पर रोकें – जैसे सड़क किनारे या किसी गैरेज/छायादार स्थान पर।
- सभी लाइटें बंद कर दें – हेडलाइट, इंडिकेटर, डैशबोर्ड और मोबाइल फ्लैशलाइट तक।
- टॉर्च या ब्रेक लाइट का इस्तेमाल भी न करें।
- यदि कार रोकना संभव न हो, तो हेडलाइट को हाई बीम से लो बीम पर कर दें।
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अगर आसपास सुरक्षित स्थान न हो तो क्या करें?
- कार के इंजन को बंद कर दें और अंदर ही बने रहें।
- खिड़कियां और दरवाज़े बंद रखें।
- यदि नजदीक कोई बंकर या मजबूत इमारत हो, तो वहां शरण लें।
- सरकारी निर्देशों के लिए रेडियो या इमरजेंसी चैनल चालू रखें।
- ब्लैकआउट अभ्यास भी हो सकता है, इसलिए पैनिक न करें।
