भारत में EV क्रांति की रफ्तार सुस्त, नीति आयोग ने की बड़े बदलावों की सिफारिश
Sustainable Transport Electric India: कुछ सालों में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री ज़रूर बढ़ी है, लेकिन यह गति चीन, अमेरिका और यूरोपीय देशों की तुलना में काफ़ी धीमी है।
- Written By: सिमरन सिंह
भारत में क्या होगा 2030 पर EV का भविष्य। (सौ. Pixabay)
Niti Aayog Report Electric Vehicles India: पिछले कुछ वर्षों में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बिक्री ज़रूर बढ़ी है, लेकिन यह गति चीन, अमेरिका और यूरोपीय देशों की तुलना में काफ़ी धीमी है। 2024 में देश में कुल वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी केवल 7.6% थी, जबकि भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक इसे 30% तक ले जाना है।
यह खुलासा सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग की ताज़ा रिपोर्ट में हुआ है, जो देश में EV सेक्टर की प्रगति और चुनौतियों को रेखांकित करती है।
टू-व्हीलर में ग्रोथ, लेकिन कार और ट्रक सेगमेंट पीछे
नीति आयोग की रिपोर्ट में साफ़ तौर पर कहा गया है कि इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इलेक्ट्रिक कार, बस और भारी वाहन क्षेत्र में प्रगति बेहद धीमी है। आयोग का मानना है कि इस कमी को दूर करने के लिए एक मज़बूत ‘राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक वाहन नीति’ की ज़रूरत है।
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रिपोर्ट का नाम और मुख्य सुझाव
“Electric Vehicles in India: Unlocking USD 200 Billion Opportunity” शीर्षक वाली रिपोर्ट ने इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। इसमें कहा गया है कि अगर भारत को 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री का लक्ष्य हासिल करना है, तो सरकार को केवल प्रोत्साहन योजनाओं तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मज़बूत नीतियाँ और नियम भी बनाने चाहिए।
वैश्विक तुलना में भारत की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ईवी की बिक्री 2016 में 50,000 इकाई से बढ़कर 2024 में 28 लाख इकाई होने की उम्मीद है। जबकि दुनिया भर में EV की बिक्री 2016 में 9.18 लाख इकाई से बढ़कर 2024 में 1.87 करोड़ इकाई होने की उम्मीद है। इससे पता चलता है कि भारत को ईवी क्रांति में अभी लंबा रास्ता तय करना है।
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भविष्य की रणनीति
नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि पाँच बड़े शहरों में बसों, मालवाहक वाहनों और पैरा-ट्रांजिट प्रणालियों को जल्द से जल्द इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित किया जाना चाहिए। इसके लिए, वित्तपोषण मॉडल, चार्जिंग नेटवर्क और एकल राष्ट्र चार्जिंग ऐप जैसे नवीन विचारों को अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से लागू करने की आवश्यकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अब ट्रकों और लंबी दूरी के वाहनों के लिए भी ठोस पहल की जानी चाहिए। जिससे आने वाले भारत के स्वरूप को बदला जा सकें।
