भारत में EV क्रांति: त्योहारों के मौसम में प्रदूषण घटाने की नई उम्मीद
Electric Vehicles Green India: भारत एक बार फिर त्योहारी रौनक और पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी के बीच संतुलन साधने की कोशिश में है। ऐसे में अब देश को सही रखने के लिए एक कदम उठाता है।
- Written By: सिमरन सिंह
EV जो देश के पर्यावरण को रखेंगा सुरक्षित। (सौ. AI)
Clean Air India: भारत एक बार फिर त्योहारी रौनक और पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी के बीच संतुलन साधने की कोशिश में है। आतिशबाज़ी, पराली जलाने और वाहनों की बढ़ती संख्या ने वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। अब समय आ गया है कि उत्सव मनाने के साथ-साथ हम पर्यावरण के प्रति संवेदनशील भी बनें। पर्यावरण के अनुकूल परिवहन अपनाना न सिर्फ शहरों को पुनर्जीवित करेगा, बल्कि भारत को सतत भविष्य की ओर भी अग्रसर करेगा।
बढ़ते वाहनों से बढ़ता पर्यावरणीय दबाव
भारत में वाहनों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। फरवरी 2025 तक देश में 389.77 मिलियन से अधिक पंजीकृत वाहन हो चुके हैं। परिवहन क्षेत्र प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में से एक है, जो कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) और पार्टिकुलेट मैटर (PM) जैसे हानिकारक तत्व उत्सर्जित करता है। हालांकि पराली जलाना, औद्योगिक उत्सर्जन और निर्माण कार्य भी वायु प्रदूषण में योगदान दे रहे हैं, लेकिन वाहनों की भूमिका सबसे अहम है।
दो-पहिया और तीन-पहिया वाहनों की अधिकता से शहरी प्रदूषण का स्तर और भी बढ़ गया है। भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग जीडीपी में 7% का योगदान देता है और यह विश्व का तीसरा सबसे बड़ा वाहन बाज़ार है। ऐसे में सतत परिवहन की ओर बदलाव भारत के लिए न केवल पर्यावरणीय बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी लाभदायक होगा। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 1 बिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम करने और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने का है।
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इलेक्ट्रिक वाहन: प्रदूषण घटाने की सशक्त पहल
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग तेजी से बढ़ रही है। फरवरी 2025 तक देश में 56.75 लाख ईवी पंजीकृत हो चुके हैं, जिससे 2020 से 2024 के बीच लगभग 1 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन को रोका जा सका है। सरकार की FAME-II योजना के तहत जून 2025 तक 16.29 लाख ईवी को समर्थन मिला है, जबकि पीएम ई-ड्राइव स्कीम के लिए ₹10,900 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इसी तरह, पीएम ई-बस सेवा के तहत 14 राज्यों और 4 केंद्रशासित प्रदेशों में 7,293 इलेक्ट्रिक बसें स्वीकृत की गई हैं।
इसके साथ ही, ₹25,938 करोड़ के ऑटोमोटिव पीएलआई और ₹18,100 करोड़ की बैटरी निर्माण प्रोत्साहन योजनाओं से भारत में 40 GWh की बैटरी उत्पादन क्षमता हासिल की जा चुकी है।
EV से बदलती कंपनियों की सोच और हवा की गुणवत्ता
डिलीवरी सेक्टर में भी ईवी का व्यापक प्रयोग बढ़ा है। Zomato और Swiggy ने 2030 तक 100% इलेक्ट्रिक डिलीवरी फ्लीट का लक्ष्य तय किया है। Flipkart पहले ही 10,000 ईवी से 55% ग्रोसरी डिलीवरी कर रहा है, जबकि Amazon India 2025 तक 10,000 इलेक्ट्रिक वैन अपने बेड़े में जोड़ेगा। Greaves Electric Mobility, TriEV और अन्य साझेदारों ने मिलकर 850 से अधिक ई-स्कूटर दिल्ली में तैनात किए हैं, जिन्हें जल्द ही 1,500 से अधिक तक बढ़ाने की योजना है।
स्वच्छ भारत की दिशा में मजबूत कदम
दिल्ली, महाराष्ट्र और चंडीगढ़ जैसे राज्य चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और नीतिगत समर्थन में अग्रणी हैं। जून 2025 तक देश में 8,885 से अधिक सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित हो चुके हैं। यह बदलाव दर्शाता है कि तकनीक, नीतियों और जनसहयोग से भारत पर्यावरण-अनुकूल गतिशीलता की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
