दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों पर अटका मामला, सरकार की बड़ी योजना में देरी, जानिए मिडिल क्लास पर क्या पड़ेगा असर

Electric Bus Tender India: पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मॉडर्न बनाने के लिए केंद्र सरकार ने PM E-DRIVE स्कीम के तहत इलेक्ट्रिक बसें खरीदने का प्लान बनाया है। हालांकि, इस स्कीम के दूसरे फेज़ में परेशानी है।
Delhi's electric bus issue stalled, major government plan delayed
Electric Bus (Source. Tata)
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Delhi Electric Bus Plan: देश के बड़े शहरों में प्रदूषण कम करने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मॉडर्न बनाने के लिए केंद्र सरकार ने PM E-DRIVE स्कीम के तहत इलेक्ट्रिक बसें खरीदने का प्लान बनाया है। हालांकि, इस स्कीम के दूसरे फेज़ के लिए जारी टेंडर को एक महीने के लिए टाल दिया गया है। असल में, संभावित कंपनियों ने दिल्ली में मिलने वाली सब्सिडी को लेकर सफाई मांगी है। इसी वजह से बिड जमा करने की आखिरी तारीख 10 मार्च से बढ़ाकर 9 अप्रैल कर दी गई है। इस टेंडर के तहत कुल 6,230 इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जानी हैं, जिन्हें अहमदाबाद, मुंबई, पुणे, हैदराबाद और दिल्ली जैसे पांच बड़े शहरों में चलाया जाएगा।

PM E-DRIVE योजना क्या है

इस बड़ी सरकारी स्कीम का मकसद बड़े शहरों में साफ़ और सस्ता पब्लिक ट्रांसपोर्ट देना है।

  • PM E-DRIVE स्कीम के तहत, देश भर के सात बड़े शहरों में कुल 14,028 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जानी हैं। सरकार ने इसके लिए लगभग ₹4,391 करोड़ का बजट दिया है।
  • ये बसें दो फेज़ में खरीदी जा रही हैं। पहले फेज़ में 10,900 बसों का टेंडर पूरा हो चुका है, जबकि दूसरे फेज़ में 6,230 बसों का प्रोसेस चल रहा है।

दिल्ली को लेकर क्यों अटका मामला

लेटेस्ट टेंडर में दिल्ली के लिए 3,330 इलेक्ट्रिक बसों की मांग की गई है। हालांकि, कंपनियों को यह साफ़ नहीं है कि ये बसें PM E-DRIVE सब्सिडी के तहत खरीदी जाएंगी या किसी दूसरे पेमेंट सिस्टम से। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अगर स्कीम के तहत सब्सिडी नहीं मिलती है, तो दिल्ली सरकार इसका खर्च उठा सकती है। हालांकि, अभी तक इसकी ऑफिशियल पुष्टि नहीं हुई है। इस अनिश्चितता के कारण, कंपनियां बोली लगाने से पहले साफ़ जवाब चाहती हैं।

नए टेंडर में किए गए अहम बदलाव

इस बार जारी किए गए टेंडर में कुछ ज़रूरी बदलाव भी किए गए हैं।

  • पहला, अब 7 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बसों के लिए बोलियां मंगाई जा रही हैं। इससे बसें पतली और भीड़भाड़ वाली सड़कों पर आसानी से चल सकेंगी।
  • दूसरा, हर बस के लिए अर्नेस्ट मनी डिपॉज़िट (EMD) लगभग ₹3 लाख से घटाकर लगभग ₹1.6 लाख कर दिया गया है, जिससे ज़्यादा कंपनियां हिस्सा ले सकेंगी।

पहले चरण में भी हुई थी कानूनी चुनौती

पिछले साल 10,900 इलेक्ट्रिक बसों के टेंडर में भी कई मुश्किलें आईं। अशोक लेलैंड फिर से टेक्निकल दिक्कतों का आरोप लगाते हुए कोर्ट चला गया। हालांकि, बाद में केस वापस ले लिया गया और टेंडर प्रोसेस पूरा हो गया। PMI इलेक्ट्रो, EKA मोबिलिटी और ओलेक्ट्रा जैसी कंपनियां सफल बिडर के तौर पर सामने आईं।

प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम

सरकार का मकसद इलेक्ट्रिक बसों के ज़रिए डीज़ल पर शहरों की निर्भरता कम करना और कार्बन एमिशन कम करना है। इस स्कीम के तहत, बस ऑपरेटर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर खरीदने, चलाने और लगाने के लिए ज़िम्मेदार हैं, जबकि ट्रांसपोर्ट एजेंसी एक फिक्स्ड रेट देती है। अगर यह स्कीम पूरी तरह से लागू हो जाती है, तो आने वाले सालों में बड़े शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट और पर्यावरण दोनों को काफी फ़ायदा हो सकता है।

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