अब कार कंपनियां बनाएंगी हथियार? अमेरिका की नई रणनीति से दुनिया में हलचल

US Defense Production: ईरान के साथ तनाव के बीच अमेरिका ने रक्षा क्षमता को और मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाना शुरू कर दिया है। अमेरिकी रक्षा विभाग बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी के साथ डिफेंस प्रोडक्शन बनाएगा।
Car Companies Now Manufacture Weapons US New Strategy
US Defense (Source. Freepik)
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Military Production: ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाना शुरू कर दिया है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग अब देश की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों के साथ मिलकर डिफेंस प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना बना रहा है। यह कदम आने वाले समय में युद्ध की तैयारियों को पूरी तरह बदल सकता है।

कार कंपनियों से शुरू हुई बड़ी बातचीत

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने जनरल मोटर्स और फोर्ड जैसी बड़ी कार कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन के साथ कई दौर की बातचीत की है। ये मीटिंग्स सिर्फ औपचारिक नहीं हैं, बल्कि एक बड़े रणनीतिक बदलाव की शुरुआत मानी जा रही हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि ऑटो इंडस्ट्री की मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का इस्तेमाल कैसे सैन्य उपकरण और हथियार बनाने में किया जा सकता है।

पहले से चल रही थी तैयारी

दिलचस्प बात यह है कि यह पहल अचानक नहीं की गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह बातचीत उस समय शुरू हो गई थी, जब ईरान के साथ तनाव खुल कर सामने भी नहीं आया था। इससे साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका पहले से ही अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए योजना बना रहा था और अपने US Defense को मजबूत कर रही है।

कार फैक्ट्री से बनेंगे हथियार?

अमेरिकी रणनीति अब सिर्फ पारंपरिक डिफेंस कंपनियों तक सीमित नहीं रहना चाहती। सरकार चाहती है कि ऑटोमोबाइल और अन्य बड़े मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी इस इकोसिस्टम का हिस्सा बनें। अगर यह योजना लागू होती है, तो वही फैक्ट्रियां जहां आज कारें बनती हैं, भविष्य में टैंक के पार्ट्स, सैन्य वाहन और अन्य रक्षा उपकरण भी तैयार कर सकती हैं। इससे जरूरत पड़ने पर बड़े पैमाने पर उत्पादन तुरंत शुरू किया जा सकेगा।

क्या सच में कंपनियां बदलेंगी अपना काम?

रिपोर्ट के अनुसार, इस बात पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है कि क्या सामान्य मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां जरूरत के समय अपने सिस्टम को तेजी से डिफेंस प्रोडक्शन में बदल सकती हैं। इस चर्चा में GE एयरोस्पेस और ओशकोश कॉर्पोरेशन जैसी कंपनियों का नाम भी सामने आया है। हालांकि, अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पूरी इंडस्ट्रियल ताकत का इस्तेमाल

अमेरिकी रक्षा विभाग का लक्ष्य है कि देश की हर संभव इंडस्ट्रियल क्षमता और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल रक्षा उत्पादन के लिए किया जाए। ऑटो कंपनियों की इंजीनियरिंग स्किल, सप्लाई चेन और बड़े स्तर पर उत्पादन करने की क्षमता को हथियार निर्माण में उपयोग करने पर जोर दिया जा रहा है।

WWII जैसा मॉडल दोहराने की तैयारी?

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रणनीति द्वितीय विश्व युद्ध के समय अपनाए गए मॉडल से मिलती-जुलती है। उस दौर में कार फैक्ट्रियों ने टैंक और एयरक्राफ्ट बनाना शुरू कर दिया था। अगर यह योजना आगे बढ़ती है, तो एक बार फिर अमेरिका का औद्योगिक सेक्टर रक्षा उत्पादन में बड़ी भूमिका निभाता नजर आ सकता है।

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