CAFE-3 regulations (Source. Freeepik)
New Cars Will Be More Expensive: देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक बड़ा बदलाव आने वाला है। 1 अप्रैल 2027 से CAFE-3 नियम लागू किए जाएंगे, जिनका सीधा असर गाड़ियों और उन्हें बनाने वाली कंपनियों पर पड़ेगा। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना और ईंधन की खपत घटाना है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पहले ही इसके संकेत दे चुके हैं और माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही इन्हें फाइनल कर देगी।
CAFE यानी कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी नियम। इसके तहत वाहन कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होता है कि सालभर में बेची गई उनकी सभी गाड़ियों का औसत माइलेज तय मानक से बेहतर हो और CO₂ उत्सर्जन सीमित रहे। यह नियम किसी एक कार पर नहीं, बल्कि कंपनी की पूरी बिक्री पर लागू होता है। भारत में इन नियमों को ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) लागू करता है, जो ऊर्जा मंत्रालय के तहत काम करता है।
भारत में CAFE-I नियम 2017 में लागू हुए थे, जिसमें कार्बन उत्सर्जन की सीमा 130g/km CO₂ तय की गई थी। यह चरण 2022 तक चला। इसके बाद 2022 में CAFE-II लागू हुआ, जिसमें यह सीमा और सख्त होकर 113g/km CO₂ कर दी गई, जो 2027 तक प्रभावी है। नियम न मानने पर कंपनियों पर भारी जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया।
CAFE-3 नियम FY28 से FY32 तक पांच सालों में लागू किए जाएंगे। इसमें 100 किलोमीटर में फ्यूल खपत को 3.7264 लीटर से घटाकर 3.0139 लीटर करने का लक्ष्य है। वहीं औसत फ्लीट उत्सर्जन को 91.7 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर से नीचे लाने की योजना है, जो पहले के मुकाबले काफी सख्त है।
इन नियमों के बाद कंपनियों को ज्यादा माइलेज वाली और साफ तकनीक वाली गाड़ियां बनानी होंगी। हाइब्रिड, इलेक्ट्रिक और CNG गाड़ियों पर ज्यादा फोकस बढ़ेगा। छोटी पेट्रोल कारों (909 किलो से कम वजन) को राहत देने का प्रस्ताव है, जिसमें उन्हें 3 ग्राम CO₂/km की अतिरिक्त छूट मिल सकती है। हालांकि, तकनीक महंगी होने से कीमतें बढ़ने की आशंका भी है।
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CAFE-3 के बाद डीजल इंजनों में और तकनीकी बदलाव जरूरी होंगे, जिससे लागत बढ़ेगी। छोटी डीजल कारों का मुनाफा पहले ही कम है, ऐसे में कई कंपनियां इन्हें बंद कर सकती हैं। हालांकि, बड़ी SUV और प्रीमियम डीजल गाड़ियां कुछ समय तक बाजार में बनी रह सकती हैं।
CAFE-3 नियम आने वाले समय में कार बाजार की दिशा बदल देंगे। जहां एक तरफ माइलेज बेहतर होगा और प्रदूषण कम होगा, वहीं दूसरी ओर गाड़ियों की कीमतें बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।