

ADAS Level 1 vs Level 2: अगर आपकी कार भी सामने संभावित टक्कर का खतरा देखकर अलर्ट करती है, लेन से अनजाने में बाहर जाने पर चेतावनी देती है या जरूरत पड़ने पर ब्रेक लगाने में मदद करती है तो यह सभी एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) तकनीक के कारण होता है। बता दें कि नई कारों में सुरक्षा तकनीक का यह हिस्सा तेजी से चर्चा में आ रहा है। लेकिन ADAS को ड्राइवर का विकल्प समझना सही नहीं है। ऐसे में आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह तकनीक कैसे काम करती है और Level 1 व Level 2 में क्या अंतर है।
ADAS के बारे में बताए तो इसको आसान भाषा में कार का ड्राइवर-असिस्ट सिस्टम कहा जा सकता है। इसमें कैमरा, रडार और दूसरे सेंसर से आसपास के ट्रैफिक, लेन और संभावित बाधाओं की जानकारी ली जाती है। जिसके बाद सिस्टम स्थिति के हिसाब से ड्राइवर को चेतावनी दे सकता है या कुछ परिस्थितियों में ब्रेकिंग और स्टीयरिंग में सहायता भी कर सकता है। इस तकनी का साफ मकसद है कि ड्राइवर के ड्राइविंग के दौरान अतिरिक्त सहायता दी जा सकें इसलिए ADAS वाली कार में भी सड़क पर पूरा ध्यान रखना जरूरी है।
ADAS पैकेज को देखा जाए तो इसमें कार के मॉडल के हिसाब से अलग-अलग फीचर मिल सकते हैं। जिसमें Forward Collision Warning (FCW) आगे टक्कर का खतरा होने पर अलर्ट करता है। इसके साथ ही Automatic Emergency Braking (AEB) संभावित टक्कर की स्थिति में ब्रेकिंग में मदद कर सकता है।
इसी तरह Lane Departure Warning (LDW) कार के लेन से बाहर जाने पर चेतावनी देता है और Lane Keeping Assist (LKA) स्टीयरिंग में मदद करके कार को लेन में रखने की कोशिश करता है। Adaptive Cruise Control (ACC) आगे चल रही कार के हिसाब से गति और दूरी बनाए रखने में सहायता करता है। इसके अलावा कुछ कारों में ब्लाइंड-स्पॉट मॉनिटरिंग और ड्राइवर अटेंशन जैसे फीचर भी शामिल किए जाते है।
इसमें सबसे अहम अंतर देखा जाए तो यह है कि Level 1 में सिस्टम लगातार ड्राइविंग के एक हिस्से में सहायता करता है या तो स्टीयरिंग में या एक्सीलरेशन/ब्रेकिंग में। वहीं Level 2 में स्टीयरिंग के साथ एक्सीलरेशन और ब्रेकिंग दोनों में एक साथ सहायता मिल सकती है। लेकिन दोनों स्तरों में ड्राइवर की जिम्मेदारी बनी रहती है। जिसका सीधा मतलब है कि ADAS को ऑटोपायलट समझकर ड्राइवर का ध्यान हटाना सुरक्षित नहीं है।
अगर आप भी ADAS तकनीक वाली कार खरीदने कि सोच रहे है तो जान लें कि इसमें फायदा फीचर की संख्या से ज्यादा उसके सही इस्तेमाल में होता है। जिसमें अलग-अलग कारों में इसके फीचर और काम करने की क्षमता अलग हो सकती है। उदाहरण के लिए, Kia Sonet में कंपनी ADAS Level 1 के साथ 10 फीचर देती है जबकि Tata Harrier के आधिकारिक दस्तावेज में ADAS Level 2 दिया गया है। इसलिए कार खरीदते समय केवल ADAS है देखकर फैसला करने के बजाय यह देखना जरूरी है कि किस Level के साथ कौन-कौन से फीचर मिल रहे हैं और वे किस परिस्थिति में काम आ सकते हैं। वहीं क्या ये फीचर्स आपकी रोज के सफर में किसी परेशानी कि प्रस्थिति में काम आएंगे या नहीं।