Rahu, Shani Or Ketu Mahadasha: तीनों में कौन सी महादशा है सबसे कठिन? जानें ज्योतिष के नियम

Mahadasha Effect: राहु, शनि और केतु की महादशा को लेकर अक्सर डर बना रहता है। जानें ज्योतिषीय मान्यताओं में तीनों ग्रहों की महादशा में से किसे कठिन माना जाता है। जानिए ज्योतिष के नियम क्या कहते हैं?
Rahu shani ketu mahadasha which is worst rrs05
ग्रहों की महादशा फोटो.एआई
Published on
Updated on

Mahadasha Astrology: ज्योतिष में महादशा का अर्थ है, व्यक्ति के जीवन में किसी ग्रह का चलने वाला लंबी अवधि का प्रभाव। इसी वजह से जब राहु, शनि या केतु की महादशा शुरू होने वाली होती है, तो कई लोगों के मन में डर पैदा हो जाता है। लेकिन क्या इन तीनों में से सबसे कठिन महादशा या सबसे खराब किसे माना जाता है?

शनि महादशा क्यों मानी जाती है कठिन?

शनि महादशा की अवधि 19 वर्ष की होती है। ज्योतिष में शनि को कर्म, अनुशासन, मेहनत, जिम्मेदारी और देरी से जोड़ा जाता है। इसलिए इस दौरान व्यक्ति को अपने काम और जिम्मेदारियों को लेकर ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। हालांकि, कुंडली में शनि की स्थिति मजबूत हो, तो जीवन में स्थिरता और सफलता आती है।

राहु महादशा में क्यों आते हैं उतार-चढ़ाव?

राहु की महादशा 18 वर्ष की मानी जाती है। जीवन में जब राहु की महादशा चलती है, तो जीवन में अचानक बदलाव, महत्वाकांक्षा, भौतिक इच्छाओं का बढ़ना और भ्रम जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। इसलिए इस अवधि में करियर, पैसा, रिश्तों या जीवनशैली में अचानक बदलाव दिखने लगता है। जब व्यक्ति के जीवन में राहु की स्थिति अनुकूल हो, तो विदेश के अवसर, प्रसिद्धि और नए क्षेत्रों में सफलता मिलती है।

क्या होती है केतु की महादशा?

केतु की महादशा 7 वर्ष की मानी जाती है। इसे वैराग्य, आध्यात्मिकता, अलगाव और अंदरूनी बदलाव से जोड़ा जाता है। इस 7 वर्षों के काल में व्यक्ति का ध्यान भौतिक चीजों से हटकर आत्मचिंतन और आध्यात्म की ओर बढ़ने लगता है। कुछ लोगों को यह समय रिश्तों या पुराने जीवन से दूर कर देता है।

Rahu shani ketu mahadasha which is worst rrs05
Puja Rituals: पूजा में क्यों फोड़ा जाता है नारियल? जानें धार्मिक मान्यता, आयुर्वेदिक महत्व और सेहत के फायदे

कौन सी महादशा है सबसे खराब है?

ज्योतिष में राहु, शनि या केतु में से किसी एक को हर व्यक्ति के लिए खराब नहीं माना जा सकता। किसी भी महादशा का फल ग्रहों की कुंडली में स्थिति, उससे जुड़े भाव, राशि, दूसरे ग्रहों के प्रभाव और इस समय में चल रही अंतर्दशा के आधार पर तय की जाती है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com