

Rahu in Kundli: ज्योतिष शास्त्र में राहु को रहस्यमयी और प्रभावशाली ग्रह माना जाता है। जिस भी व्यक्ति के जीवन में राहु का प्रवेश होता है, उसके जीवन में पहले बेशुमार सफलता आती है और इसके बाद परेशानियों का दौर शुरु होता है। राहु व्यक्ति की महत्वाकांक्षा, भौतिक इच्छा, प्रसिद्धि, अचानक मिलने वाले अवसर और सफलता से जुड़ा होता है।
यही वजह है कि कुंडली में राहु की मजबूत स्थिति अकसर शुरुआत में बड़ी उपलब्धियां देती है, लेकिन इसके बाद परेशानियों का दौर शुरु होता है, आखिर ऐसा क्यों है?
ज्योतिष शास्त्र में राहु व्यक्ति के अंदर कुछ बड़ा हासिल करने की इच्छा को बढ़ावा देता है। राहु का प्रभाव व्यक्ति को सामान्य रास्ते से हटकर नए प्रयोग करने और तेजी से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
राहु से जुड़ी सबसे प्रमुख बात है इस समय काल में असीमित इच्छाओं का होना। व्यक्ति को एक उपलब्धि मिलने के बाद उसे बड़ी उपलब्धि हासिल करने की चाह होने लगती है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति को अचानक करियर में बड़ा अवसर मिलता है।
इसके बाद पैसा, पद, प्रसिद्धि और सामाजिक प्रभाव बढ़ने लगता है, लेकिन अगर यही महत्वाकांक्षा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए तो व्यक्ति अभिमान में अधिक खतरे उठाने लगता है। ज्योतिषीय में यही राहु के अच्छे प्रभाव के धीरे-धीरे चुनौती में बदलने का एक कारण माना जाता है।
राहु को छाया ग्रह कहा जाता है। ज्योतिष में इसके छाया ग्रह होने के कारण यह भ्रम और मोह पैदा करता है। किसी व्यक्ति पर राहु के नकारात्मक प्रभाव होने के निम्न लक्षण हो सकते हैं-
जरूरत से ज्यादा महत्वाकांक्षा
सफलता के लिए शॉर्टकट अपनाने की इच्छा
जल्दबाजी में फैसले लेना
अधिक धन या प्रसिद्धि का लालच
जोखिम को कम आंकना
वास्तविकता और भ्रम के बीच अंतर न कर पाना
इसलिए समस्या जीवन में राहु के प्रवेश के बाद मिलने वाली सफलता में नहीं होती। कई बार सफलता के बाद होने वाली अति महत्वाकांक्षा से होती है।
राहु का परिणाम हर बार ऐसा नहीं होता है। यह किसी व्यक्ति की पूरी जन्मकुंडली के आधार पर तय होता है, जैसे- राहु किस भाव और राशि में स्थित है, किस नक्षत्र में है, किन ग्रहों से उसका संबंध है और कौन-सी दशा चल रही है, जैसी चीजें भी महत्वपूर्ण होती है।