जिम्बाब्वे करिबा झील नाव हादसा फोटो (सोर्स- सोशल मीडिया)
विदेश

जिम्बाब्वे की करिबा झील में हुआ बड़ा हादसा, नाव पलटने से 15 लोगों की मौत और 20 लोग लापता

Zimbabwe Kariba Boat Accident: जिम्बाब्वे की करिबा झील में ओवरलोडिंग के कारण 114 लोगों को ले जा रही नाव पलटने से 15 लोगों की मौत हो गई और 20 लोग लापता हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है।

प्रिया सिंह

Zimbabwe Kariba Boat Accident: जिम्बाब्वे की करिबा झील में एक बड़ा नाव हादसा हुआ है। यहां यात्रियों को ले जा रही एक नाव लहरों से टकराकर पलट गई, जिससे कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई। नाव पर क्षमता से अधिक लोग सवार थे, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया है।

हादसे के समय नाव पर 90 यात्रियों की क्षमता के मुकाबले कम से कम 114 वयस्क और पांच क्रू मेंबर सवार थे। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस नाव को खराब मौसम में भी सामान्य रूप से उतारा गया था, जो दुर्घटना का कारण बना। अब तक इस अभियान में 60 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है।

हादसे का समय 

यह दर्दनाक हादसा मंगलवार को जिम्बाब्वे की करिबा झील में हुआ। बताया जा रहा है कि यह नाव उत्तरी शहर करिबा और कई द्वीपों तथा मछली पकड़ने के शिविरों के बीच नियमित परिवहन का काम करती थी। लेकिन क्षमता से अधिक भार होने और खराब मौसम के चलते यह दुर्घटना का शिकार हो गई।

हादसे का कारण और राहत अभियान

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब यह नाव झील के बीच में पहुंची तो तेज लहरों से टकरा गई। लहरों के थपेड़ों के कारण नाव का इंजन अचानक बंद हो गया और वह असंतुलित होकर पलट गई। हादसे के तुरंत बाद पुलिस और स्थानीय गोताखोरों ने मिलकर एक बड़ा राहत अभियान शुरू किया।

अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस अभियान के तहत अब तक 60 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। हालांकि, अभी भी 20 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में खोजी दल लगातार काम कर रहा है। पुलिस ने मलबे से 15 शवों को बाहर निकाला है।

दुनिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील

करिबा झील जिम्बाब्वे और जाम्बिया की सीमा पर स्थित है, जो राजधानी हरारे से लगभग 300 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है। यह दुनिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित झील मानी जाती है। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 5,400 वर्ग किलोमीटर है, जो इसे अफ्रीका में बहुत प्रसिद्ध और विशाल बनाता है।

इस विशाल झील का निर्माण जाम्बेजी नदी पर प्रसिद्ध करिबा बांध के बनने के बाद हुआ था। बांध का निर्माण कार्य 1950 के दशक में शुरू किया गया था। इसके बाद, 1960 के दशक की शुरुआत में झील में पानी भरने की प्रक्रिया पूरी हो गई थी।

सुरक्षा मानकों पर खड़े हुए सवाल

इस बड़े हादसे के बाद जिम्बाब्वे के स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा मानकों पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि क्षमता से अधिक यात्रियों को ले जाने की अनुमति कैसे दी गई। प्रशासन ने मामले की जांच करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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