यमन के पूर्व राष्ट्रपति अब्द-रब्बू मंसूर हादी का 80 वर्ष की आयु में रियाद में निधन (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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Mansour Hadi Death: यमन के पूर्व राष्ट्रपति अब्द-रब्बू मंसूर हादी का 80 की उम्र में निधन

Mansour Hadi Death: यमन के पूर्व राष्ट्रपति मंसूर हादी का 80 वर्ष की आयु में रियाद में निधन हो गया है। उन्होंने यमन के सबसे कठिन समय में देश का नेतृत्व किया था। परिवार ने निधन की जानकारी दी।

प्रिया सिंह

Yemen Leader Mansour Hadi Death: अब्द-रब्बू मंसूर हादी के निधन से यमन में एक बड़े राजनीतिक युग का हमेशा के लिए अंत हो गया है। उनका निधन 80 साल की उम्र में सऊदी अरब के रियाद शहर के एक अस्पताल में हुआ है। यमन टीवी और उनके परिवार के करीबी सूत्रों ने इस बेहद दुखद खबर की आधिकारिक पुष्टि की है। हादी का स्वास्थ्य हाल के दिनों में अचानक काफी बिगड़ने के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

पूर्व राष्ट्रपति हादी का जन्म 1 सितंबर 1945 को यमन के दक्षिणी प्रांत अबयान में हुआ था और वह बहुत लोकप्रिय थे। वह अपने जीवन में सैन्य और राजनीतिक रैंक में लगातार आगे बढ़ते हुए अक्टूबर 1994 में यमन के उपराष्ट्रपति बने थे। इसके बाद लंबे समय तक काम करते हुए फरवरी 2012 में उन्होंने देश के राष्ट्रपति पद की बड़ी जिम्मेदारी संभाली थी। यह पद उन्होंने अली अब्दुल्ला सालेह के इस्तीफे और अरब स्प्रिंग के दौरान हुए भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद गल्फ सपोर्टेड ट्रांजिशन प्लान के तहत संभाला था।

राष्ट्रपति के रूप में उनका अहम सफर

हादी ने यमन के सबसे मुश्किल समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त राष्ट्रपति के रूप में देश का अहम काम किया। पद संभालने के बाद मंसूर हादी ने यमन के सैन्य और सुरक्षा संस्थानों के ढ़ांचों में सबसे बड़ा और जरूरी बदलाव शुरू किया था। इसमें दुश्मन हथियारबंद समूहों को एक करने और सेना और सुरक्षा इकाई को फिर से मजबूत व संगठित करने की पूरी कोशिश की गई थी। साल 2010 के अंत में अरब स्प्रिंग की शुरुआत हुई थी जिसने मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में सरकार-विरोधी विरोध प्रदर्शनों को तेज किया था। इस विशाल क्रांतिकारी लहर ने क्षेत्र के कई दशकों पुराने सत्तावादी शासनों को चुनौती दी और उन्हें पूरी तरह से उखाड़ फेंका था। इसी नाजुक दौर में हादी ने यमन के राजनीतिक बदलावों को बहुत करीब से देखा और देश को एक नई दिशा देने का प्रयास किया।

हूती विद्रोह और गहराता राजनीतिक संकट

यमन का यह राजनीतिक परिवर्तन तब बहुत बुरी तरह से बिगड़ गया जब हूती सेना दक्षिण की ओर तेजी से बढ़ी। इन हूती लड़ाकों ने आगे बढ़ते हुए सना में जरूरी सरकारी संस्थानों पर अपना पूरा कब्जा कर लिया। इसके बाद जनवरी 2015 में हूती फाइटर्स ने प्रेसिडेंशियल पैलेस को घेर कर हादी को हाउस अरेस्ट कर लिया, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

नजरबंद होने के अगले महीने हादी दक्षिणी पोर्ट सिटी अदन भाग गए और वहां अपना इस्तीफा वापस लेकर विदेशी दखल की जोरदार मांग की। उनकी इस मांग पर 26 मार्च 2015 को सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूतियों के खिलाफ सीधा सैन्य दखल दिया। इस बड़े दखल से एक भयानक लड़ाई शुरू हो गई और यह दुनिया के सबसे बुरे मानवीय संकटों में से एक खतरनाक स्थिति बन गई।

सत्ता का अंतिम रूप से हस्तांतरण

लंबे संघर्ष के बाद अप्रैल 2022 में हादी ने अपनी पावर आठ सदस्यों वाली राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद को पूरी तरह से ट्रांसफर कर दी। उनका यह कदम हूती विरोधी गुटों को एकजुट करने और लड़ाई के राजनीतिक समाधान की कोशिशों को फिर से शुरू करने के मकसद से उठाया गया था। आज भी यमन मुख्य रूप से हूती विद्रोहियों और अदन में मौजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के बीच बुरी तरह से बंटा हुआ है।

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