अरामको रिफाइनरी पर ईरान का ड्रोन अटैक (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी पर हमला, अरामको रिफाइनरी पर ईरान ने किया ड्रोन अटैक, सामने आया खौफनाक VIDEO

Middle-East Tension: सऊदी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रास तनुरा में सबसे बड़ी घरेलू रिफाइनरी अरामको को निशाना बनाकर ड्रोन हमले की कोशिश की गई। ईरान के इस अटैक का एक वीडियो भी सामने आया है।

अभिषेक सिंह

Drone Attack on Aramco Refinery: सऊदी अरब की बड़ी तेल कंपनी अरामको की रास तनुरा रिफाइनरी पर एक और ड्रोन हमले की खबर सामने आ रही है। सऊदी रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कन्फर्म किया है कि आज रास तनुरा में रिफाइनरी की सबसे बड़ी घरेलू रिफाइनरी को निशाना बनाकर ड्रोन हमले की कोशिश की गई।

शुरुआती जांच से पता चला है कि हमला ड्रोन का इस्तेमाल करके किया गया था, लेकिन इससे कोई नुकसान नहीं हुआ और यह नाकाम रहा। इस हफ्ते सोमवार को ईरानी शाहेद-136 आत्मघाती ड्रोन के बाद रास तनुरा रिफाइनरी में आग लग गई, जिससे अरामको को सुरक्षा कारणों से प्लांट की कुछ यूनिट्स को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा।

सामने आया ड्रोन अटैक का वीडियो

हमले से मलबे से थोड़ी आग लगी जिस पर जल्दी काबू पा लिया गया, लेकिन लोकल मार्केट में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई पर कोई असर नहीं पड़ा। सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल एक्सपोर्टर है और इसके ज्यादातर तेल फील्ड ईरान से खाड़ी के पार पूर्वी तट पर हैं। अरामको रिफाइनरी पर ईरानी ड्रोन अटैक का वीडियो भी सामने आया है।

गौरतलब है कि ईरान पर US और इजरायल के जॉइंट हमलों के बाद, ईरान ने इस इलाके में US के साथियों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। ईरान होर्मुज स्ट्रेट में टैंकरों को भी निशाना बना रहा है, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस गुजरता है।

आरामको ने रोका LPG एक्सपोर्ट

इस हफ्ते की शुरुआत में हुए हमले के बाद अरामको ने कुछ हफ्तों के लिए लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का एक्सपोर्ट रोक दिया, हालांकि लोकल सप्लाई नॉर्मल रही। कंपनी होर्मुज स्ट्रेट से बचने के लिए कुछ एक्सपोर्ट को रेड सी रूट से रीडायरेक्ट करने की कोशिश कर रही है, लेकिन ईरान का दावा है कि यह रूट सिर्फ चीनी जहाज़ों के लिए खुला है।

तेल की कीमतों में भारी उछाल

इस बीच क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ने से तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतें 1.11 डॉलर या 1.4% बढ़कर 82.53 डॉलर प्रति बैरल हो गईं, जो जनवरी 2025 के बाद का सबसे ऊंचा लेवल है। ग्लोबल मार्केट में सप्लाई की चिंताओं से कीमतें और बढ़ सकती हैं।

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