युवक की सांकेतिक फोटो। सोर्स: यह फोटो AI की मदद से तैयार किया गया है।
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14 की उम्र में किया अपराध, सऊदी अरब में अब मिली फांसी; जानें कौन है हसन अल-फराज ?

Saudi Arabia Executed News: सऊदी अरब में हसन जकी अल-फराज को उन कथित अपराधों के लिए फांसी दी गई, जो उसने किशोरावस्था में किए थे। ह्यूमन राइट्स वॉच ने निष्पक्ष सुनवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

अमन कुमार पाण्डेय

Highlights

  • सऊदी अरब में हसन अल-फराज को 17 अक्टूबर को फांसी दी गई।

  • आरोप है कि उसने 14 साल की उम्र में कथित अपराध किए थे।

  • HRW ने यातना और निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलने के आरोप लगाए।

  • यूसुफ अल-मनासिफ की मौत की सजा भी बरकरार रखी गई।

  • दो बांग्लादेशी नागरिकों को फांसी दिए जाने पर भी विवाद जारी है।

Who is Hassan Al-Faraj: सऊदी अरब में मृत्युदंड को लेकर एक बार फिर मानवाधिकारों से जुड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) के मुताबिक, सऊदी अधिकारियों ने 17 अक्टूबर को हसन जकी अल-फराज को फांसी दे दी। आरोप है कि जिन अपराधों के लिए उसे मौत की सजा सुनाई गई, उनमें से कुछ उस समय के हैं, जब वह महज 14 साल का था। इस घटना के बाद किशोरावस्था में किए गए कथित अपराधों के लिए मृत्युदंड दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।

सऊदी अरब में एक और व्यक्ति पर फांसी का खतरा

HRW ने बताया कि सऊदी अरब की सुप्रीम कोर्ट ने यूसुफ अल-मनासिफ की मौत की सजा भी बरकरार रखी है। उस पर 15 से 16 साल की उम्र में कथित अपराध करने का आरोप है। इसके अलावा, कम से कम तीन अन्य लोग भी ऐसे हैं, जिन्हें बचपन में किए गए अपराधों के लिए मृत्युदंड सुनाया गया है।

मानवाधिकार संगठन की सीनियर रिसर्चर जोई शिया ने अल-फराज के मामले में निष्पक्ष सुनवाई पर सवाल उठाए। संगठन के अनुसार, पूछताछ के दौरान यातना देकर कबूलनामा हासिल करने के आरोप भी लगे थे।

शिया समुदाय के समर्थन में प्रदर्शनों से जुड़ा मामला

HRW के मुताबिक, अल-फराज को 27 नवंबर 2017 को गिरफ्तार किया गया था। बताया गया कि उसने शिया अल्पसंख्यक समुदाय के साथ कथित भेदभाव के विरोध में हुए प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। उस पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत आरोप लगाए गए और 3 नवंबर 2022 को उसे मौत की सजा सुनाई गई।

यूरोपियन सऊदी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार, कई अन्य लोगों को भी किशोरावस्था में कथित आतंकवाद से जुड़े अपराधों के लिए मृत्युदंड सुनाया गया है।

बांग्लादेशी नागरिकों को फांसी के बाद विवाद

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब 14 अक्टूबर को बांग्लादेश के दो नागरिकों, नजरुल इस्लाम और स्वीटी अख्तर को सऊदी अरब में फांसी दिए जाने की खबरों पर सवाल उठे हैं। बांग्लादेश ने इस मामले में अधिक जानकारी मांगी है। रिपोर्टों में दोनों के कथित अपराध को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं, लेकिन उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मानवाधिकार संगठनों ने किशोरों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष सुनवाई और मृत्युदंड के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है।

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