

Highlights
इटली में हिंसक प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
दंगा करने पर 5 साल तक जेल हो सकती है।
तोड़फोड़ पर 21 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान।
नाबालिगों की हिंसा पर माता-पिता से जुर्माना वसूला जा सकता है।
पुलिस को 14 से 17 साल के किशोरों को हिरासत में लेने का अधिकार देने का प्रावधान।
Italy Violent Protests: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने हिंसक प्रदर्शनों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। सरकार ने सुरक्षा संबंधी नए आदेश को मंजूरी दी है, जिसके तहत प्रदर्शन के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट करने वालों को जेल और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। नए प्रावधानों में नाबालिगों के हिंसक गतिविधियों में शामिल होने पर उनके माता-पिता की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
प्रधानमंत्री मेलोनी ने मंगलवार को नए आदेश की घोषणा करते हुए कहा कि चोरी और तोड़फोड़ को विरोध जताने का तरीका बताकर उचित नहीं ठहराया जा सकता। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और हिंसा पर रोक लगाने के लिए ये कदम उठाए गए हैं।
नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति कम से कम पांच लोगों के ऐसे समूह का हिस्सा बनता है, जो प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है, तो उसे पांच साल तक की जेल और 20 हजार यूरो तक का जुर्माना हो सकता है। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 21 लाख रुपये से अधिक बैठती है।
प्रदर्शन के दौरान चेहरा छिपाने या लोगों को घायल करने जैसी गतिविधियों पर भी सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। इसके अलावा, अधिकारियों को हिंसा के कारण हुए नुकसान की भरपाई का आदेश देने का अधिकार मिलेगा।
इटली सरकार के नए आदेश के तहत, यदि नाबालिग तोड़फोड़ या लूटपाट में शामिल पाए जाते हैं, तो उनके माता-पिता पर आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके साथ ही पुलिस को 14 से 17 वर्ष के किशोरों को संभावित खतरे के आधार पर हिरासत में लेने का अधिकार देने का भी प्रावधान किया गया है।
यह कदम उत्तरी इटली में हाल ही में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद उठाया गया है। देश की आर्थिक राजधानी मिलान में प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़, दुकानों में लूटपाट और पुलिस पर हमले की घटनाएं सामने आई थीं।
इटली सरकार के इन कदमों की तुलना भारत के उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में अपनाई गई सख्त कार्रवाई से की जा रही है। हालांकि, दोनों देशों के कानून और उनकी कानूनी प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं।