प्रतीकात्मक फोटो। सोर्स: AI
विदेश

दुनिया के किस देश के लोग सबसे ज्यादा बुद्धिमान? पाकिस्तान 74वें नंबर पर; जानें भारत किस पायदान पर

Highest IQ Country in The World: दुनिया के किस देश के लोगों का IQ लेवल सबसे ज्यादा होता है? भारत-पाकिस्तान में से कहां के लोग ज्यादा बुद्धिमान हैं? यदि ऐसे सवाल आपके मन में है तो यह खबर आपके लिए है।

अमन कुमार पाण्डेय

Highlights:

  • 143 देशों की IQ रैंकिंग में भारत की स्थिति

  • पूर्वी एशियाई देशों के टॉप पर रहने की वजह

  • अमीर खाड़ी देशों का IQ रैंकिंग में पिछड़ना

Highest IQ Level Which Country People in World: दुनिया के अलग-अलग देशों की औसत IQ (इंटेलिजेंस कोशेंट) को लेकर जारी एक नई रैंकिंग में भारत की स्थिति भी सामने आई है। इस रैंकिंग में हांगकांग पहले स्थान पर है, जबकि सोमालिया सबसे आखिरी पायदान पर है। खास बात यह है कि पहले और आखिरी स्थान पर मौजूद देशों के औसत IQ स्कोर में 23.89 अंकों का अंतर है। यानी 143 देशों और क्षेत्रों की इस सूची में सबसे ज्यादा और सबसे कम औसत IQ के बीच का अंतर उतना बड़ा नहीं है, जितना आमतौर पर माना जाता है।

यह आंकड़ा इंटरनेशनल IQ टेस्ट के ऑनलाइन असेसमेंट पर आधारित है। साल 2025 में दुनिया भर के 12 लाख से अधिक लोगों ने यह टेस्ट दिया था। सभी प्रतिभागियों ने एक ही टेस्ट दिया, जिससे अलग-अलग तरह के टेस्ट के आधार पर देशों की तुलना करने की समस्या कम होती है। इस टेस्ट में औसत स्कोर 100 और स्टैंडर्ड डेविएशन 15 रखा गया है।

IQ रैंकिंग में भारत किस नंबर पर

डेटापांडास साइट के अनुसार इस सूची में भारत 53वें स्थान पर है। भारत का औसत IQ स्कोर 98.44 दर्ज किया गया है, जो 100 के वैश्विक औसत से थोड़ा कम है। भारत के ठीक ऊपर मलेशिया 52वें स्थान पर है, जिसका स्कोर 98.51 है। वहीं भारत के बाद मोंटेनेग्रो 54वें स्थान पर है। पड़ोसी देशों में श्रीलंका 18वें, बांग्लादेश 67वें, नेपाल 68वें और पाकिस्तान 74वें स्थान पर है। 

पूर्वी एशियाई देशों का दबदबा

रैंकिंग में पूर्वी एशियाई देशों का दबदबा साफ दिखाई देता है। हांगकांग 107.73 अंकों के साथ पहले नंबर पर है। दक्षिण कोरिया 106.97 अंकों के साथ दूसरे और चीन 106.48 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है। जापान 106.35 अंकों के साथ चौथे, मकाऊ 106.32 के साथ पांचवें और ताइवान 105.84 के साथ छठे स्थान पर है।

इस सूची में ईरान सातवें स्थान पर है। उसका औसत IQ स्कोर 104.80 है। ऑस्ट्रेलिया आठवें, रूस नौवें और सिंगापुर दसवें स्थान पर है।

पूर्वी एशियाई देशों के बेहतर प्रदर्शन के पीछे शिक्षा व्यवस्था को एक प्रमुख कारण माना गया है। दक्षिण कोरिया में हगवॉन (Hagwon) नाम से निजी कोचिंग संस्थानों का बड़ा नेटवर्क है। यहां लगभग चार में से तीन छात्र स्कूल के बाद अतिरिक्त पढ़ाई करते हैं। जापान में भी जुुकू (Juku) नाम से कोचिंग संस्थान संचालित होते हैं। वहां मिडिल स्कूल के 60 प्रतिशत से अधिक छात्र इन संस्थानों में पढ़ते हैं।

इन देशों में शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाता है। छात्रों को पैटर्न पहचानने, याददाश्त और समय के भीतर समस्याओं को हल करने जैसे कौशल विकसित करने का प्रशिक्षण मिलता है। ये ऐसे कौशल हैं, जिनका इस्तेमाल मानकीकृत परीक्षाओं में भी होता है।

शिक्षा और पोषण का IQ पर असर

रिपोर्ट में शिक्षा और IQ के बीच गहरे संबंध की बात कही गई है। 138 देशों के आंकड़ों में औसत IQ और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के एजुकेशन इंडेक्स के बीच समानता देखी गई है।

साल 2018 में स्टुअर्ट रिची और इलियट टकर-ड्रोब के एक मेटा-एनालिसिस में 6 लाख से अधिक लोगों पर किए गए अध्ययनों का विश्लेषण किया गया था। यह अध्ययन मनोवैज्ञानिक विज्ञान (Psychological Science) में प्रकाशित हुआ था। इसमें पाया गया कि औपचारिक शिक्षा का हर अतिरिक्त साल किसी व्यक्ति के मापे गए IQ स्कोर में औसतन 1 से 5 अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है।

इसी तरह पोषण भी बच्चों के मानसिक विकास में अहम भूमिका निभाता है। यूनिसेफ के मुताबिक, आयोडीन की कमी बच्चों के IQ को 8 से 12.5 अंकों तक प्रभावित कर सकती है। दुनिया में हर साल लगभग 1.9 करोड़ बच्चे आयोडीन की कमी के जोखिम के साथ पैदा होते हैं। ऐसे में बेहतर शिक्षा और पोषण को संज्ञानात्मक विकास के महत्वपूर्ण कारकों में गिना जाता है।

DataPandas साइट का डेटा मैप

अमीर देश भी IQ रैंकिंग में पीछे

इस रैंकिंग में एक दिलचस्प बात यह भी है कि ज्यादा अमीर होने का मतलब बेहतर IQ स्कोर होना नहीं है। कतर 97.94 अंकों के साथ 61वें स्थान पर है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) 97.39 अंकों के साथ 66वें और सऊदी अरब 94.07 अंकों के साथ 99वें स्थान पर है।

इसके उलट वियतनाम 102.26 अंकों के साथ 13वें और ईरान 104.80 अंकों के साथ सातवें स्थान पर है। इन देशों की प्रति व्यक्ति आय कई खाड़ी देशों से काफी कम है, लेकिन IQ रैंकिंग में इनका प्रदर्शन बेहतर है।

क्या इस रैंकिंग को पूरी आबादी का IQ मान सकते हैं?

इस रैंकिंग की सबसे बड़ी सीमा इसका सैंपल है। इसमें शामिल 12 लाख से अधिक लोगों ने अपनी इच्छा से ऑनलाइन टेस्ट दिया था। इसका मतलब यह नहीं है कि हर देश की आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों को वैज्ञानिक तरीके से चुनकर यह परीक्षा कराई गई।

जिन देशों में इंटरनेट की पहुंच कम है, वहां ऑनलाइन टेस्ट देने वाले लोग आमतौर पर शहरी, शिक्षित और आर्थिक रूप से बेहतर स्थिति वाले हो सकते हैं। इसलिए इनका प्रदर्शन पूरी आबादी की औसत क्षमता को नहीं दर्शाता।

सोमालिया इसका उदाहरण है। वह 83.84 अंकों के साथ आखिरी स्थान पर है। UNDP के मुताबिक, वहां लोगों के औसत स्कूली शिक्षा के साल महज 1.9 हैं। ऐसे में ऑनलाइन टेस्ट देने वाले सोमाली नागरिकों को पूरे देश की आबादी का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता।

रिपोर्ट के अनुसार, 84.8 प्रतिशत देशों में पिछले साल की तुलना में औसत IQ स्कोर में दो अंकों से कम का बदलाव हुआ। इससे आंकड़ों में स्थिरता का संकेत मिलता है, लेकिन यह उनकी प्रतिनिधिकता की गारंटी नहीं है।

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