डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी। सोर्स: सोशल मीडिया
विदेश

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव हारने से भारत को क्या फायदा? 5 प्वॉइंट में जानें

US Midterm Election: अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से ट्रंप की राजनीतिक ताकत की परीक्षा होगी। नतीजों का असर भारत-अमेरिका संबंधों, पाकिस्तान और AI चिप की नीतियों पर पड़ सकता है।

अमन कुमार पाण्डेय

Highlights:

  • मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा का बहुमत गंवा सकती है, ट्रंप की बढ़ेंगी मुश्किलें।

  • डेमोक्रेट्स की जीत से पाकिस्तान के साथ ट्रंप परिवार के कारोबारी रिश्तों की जांच तेज हो सकती है।

  • भारत-अमेरिका संबंधों, ईरान युद्ध और AI चिप के निर्यात पर अमेरिकी संसद के रुख का असर पड़ेगा।

Donald Trump losing US Midterm Election: अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक करियर की बड़ी परीक्षा माने जा रहे हैं। इस चुनाव में प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और सीनेट पर नियंत्रण के लिए मुकाबला होगा। चुनाव के नतीजे सिर्फ अमेरिका की घरेलू राजनीति ही नहीं, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों, ईरान युद्ध, पाकिस्तान के साथ अमेरिकी रिश्तों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की नीतियों को भी प्रभावित कर सकते हैं।

राष्ट्रपति बनने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट आई है। उनकी अप्रूवल रेटिंग 47 फीसदी से घटकर औसतन करीब 37 फीसदी रह गई है। कुछ सर्वे में यह 33 से 34 फीसदी तक पहुंच गई है। अर्थव्यवस्था, ईंधन की बढ़ती कीमतों और ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है। चुनावी अनुमानों के मुताबिक, रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा में अपना बहुमत गंवा सकती है। वहीं, सीनेट में भी डेमोक्रेट्स की स्थिति पहले से मजबूत हुई है।

1. कांग्रेस पर डेमोक्रेट्स का कब्जा हुआ तो क्या बदलेंगे ट्रंप के फैसले?

अमेरिकी राजनीति के जानकारों का मानना है कि मिडटर्म चुनाव से देश की विदेश नीति की बुनियादी दिशा आमतौर पर नहीं बदलती। काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के जेम्स लिंडसे के मुताबिक, 2006 में इराक युद्ध के खिलाफ नाराजगी के कारण डेमोक्रेट्स ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में जीत हासिल की थी। इसके बावजूद तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने इराक से अमेरिकी सेना वापस बुलाने के बजाय 2007 में 20 हजार से ज्यादा अतिरिक्त सैनिक भेज दिए थे।

हालांकि, कांग्रेस में बहुमत बदलने से राष्ट्रपति पर राजनीतिक और विधायी दबाव बढ़ जाता है। ट्रंप ने ईरान युद्ध और वैश्विक टैरिफ जैसे फैसलों के लिए कांग्रेस की मंजूरी नहीं ली है। इसलिए डेमोक्रेट्स के जीतने पर भी इन फैसलों को तुरंत पलटना आसान नहीं होगा। लेकिन जांच, सुनवाई और बजट रोकने जैसे कदमों से ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

2. ईरान युद्ध पर ट्रंप को घेरेंगे डेमोक्रेट्स, भारत की भी नजर

ईरान युद्ध अमेरिका में अलोकप्रिय होता जा रहा है। इसकी वजह से ऊर्जा की कीमतें बढ़ी हैं और वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ है। डेमोक्रेट्स इस युद्ध को रोकने के लिए नए बजट में फंडिंग पर रोक लगाने की कोशिश कर सकते हैं।

हालांकि, इसके लिए सीनेट की मंजूरी भी जरूरी होगी। इसके अलावा ट्रंप ऐसे किसी प्रस्ताव को वीटो कर सकते हैं। फिर भी प्रतिनिधि सभा में बहुमत मिलने पर डेमोक्रेट्स युद्ध को लेकर सुनवाई करा सकते हैं और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को निशाने पर ले सकते हैं। उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश भी हो सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम पर भारत की नजर रहेगी। ईरान युद्ध ने पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ाई है। वैश्विक समुद्री परिवहन प्रभावित हुआ है और कई भारतीय नाविकों की जान भी गई है। भारत चाहता है कि युद्ध जल्द खत्म हो। ऐसे में अमेरिकी संसद में इस मुद्दे पर होने वाली बहस नई दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण होगी।

3. पाकिस्तान के साथ ट्रंप की नजदीकी पर हो सकती है जांच

ट्रंप प्रशासन के पाकिस्तान के साथ बढ़ते रिश्ते भारत के लिए चिंता का विषय रहे हैं। खासकर पाकिस्तान सरकार और ट्रंप परिवार से जुड़े कारोबार के बीच बढ़ते संपर्कों को लेकर सवाल उठे हैं।

2025 में पाकिस्तान के एक सरकारी निकाय ने ट्रंप परिवार से जुड़ी क्रिप्टो कंपनी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल के साथ आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। इसके अलावा न्यूयॉर्क स्थित पाकिस्तान के रूजवेल्ट होटल के पुनर्विकास के लिए अमेरिकी सरकारी एजेंसी जनरल सर्विसेज एडमिनिस्ट्रेशन के साथ समझौते की दिशा में भी पहल हुई थी।

डेमोक्रेट्स इन सौदों को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उनका कहना है कि ट्रंप के वकील से जुड़ी लॉ फर्म सुलिवन एंड क्रॉमवेल को इस सौदे को संभालने का ठेका मिला था।

अगर प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स को बहुमत मिलता है तो वे इन मामलों की जांच करा सकते हैं। अनंता एस्पेन सेंटर की अंतरराष्ट्रीय संबंधों की उपनिदेशक प्रेरणा बौन्ट्रा के मुताबिक, ट्रंप परिवार के कारोबारी हितों और सरकारी फैसलों के बीच संभावित हितों के टकराव की जांच डेमोक्रेट्स की प्राथमिकता हो सकती है। इसमें पाकिस्तान का नाम भी सामने आ सकता है।

4. भारत-अमेरिका रिश्तों और AI चिप पर क्या होगा असर?

प्रतिनिधि सभा में जीत के बाद डेमोक्रेट्स को हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी जैसी महत्वपूर्ण समितियों का नेतृत्व मिल सकता है। न्यूयॉर्क के सांसद ग्रेगरी मीक्स इस समिति के अध्यक्ष बन सकते हैं। वह लंबे समय से भारत-अमेरिका साझेदारी के समर्थक रहे हैं और ट्रंप प्रशासन की भारत नीति की आलोचना भी कर चुके हैं।

कैलिफोर्निया की सांसद सिडनी कमलेगर-डोव भी भारत के साथ रिश्तों की समर्थक हैं। उन्हें दक्षिण एशिया उपसमिति की जिम्मेदारी मिल सकती है। इससे अमेरिकी संसद में भारत से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का रुख प्रभावित हो सकता है।

इसके अलावा AI और सेमीकंडक्टर चिप का मुद्दा भी अहम रहेगा। रॉयटर्स/इप्सोस के 7 अक्टूबर को प्रकाशित सर्वे में 84 फीसदी मतदाताओं ने AI को अमेरिकी कामगारों के लिए खतरा बताया। वहीं 56 फीसदी लोगों ने डेटा सेंटर बनाने पर पाबंदियों का समर्थन किया।

डेमोक्रेट्स AI कंपनियों पर सख्त नियम लागू करने के पक्ष में हैं। भारत की चिंता इस बात को लेकर है कि अमेरिकी संसद कहीं एडवांस्ड चिप के निर्यात पर फिर से प्रतिबंध सख्त न कर दे। इससे भारत के AI मिशन और तकनीकी विकास पर असर पड़ सकता है।

5. 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की भी बनेगी जमीन

मिडटर्म चुनाव के नतीजे 2028 के अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव की दिशा भी तय कर सकते हैं। ट्रंप अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के आखिरी दो वर्षों में प्रवेश कर रहे हैं। ऐसे में डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत पार्टी में नया उत्साह भर सकती है।

वहीं, रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार के बाद ट्रंप की राजनीतिक रणनीति और MAGA आंदोलन के भविष्य पर सवाल उठ सकते हैं। हालांकि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो को 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के संभावित दावेदारों में गिना जा रहा है।

डेमोक्रेट्स के प्रगतिशील धड़े की बढ़ती ताकत भी भारत के लिए चुनौती बन सकती है। इस धड़े के कुछ नेता भारतीय सरकार की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। दूसरी ओर, रिपब्लिकन पार्टी के दक्षिणपंथी धड़े में भी भारत विरोधी टिप्पणियों को लेकर चिंता जताई गई है।

कुल मिलाकर, 3 नवंबर का चुनाव यह तय करेगा कि ट्रंप को अपने कार्यकाल के आखिरी दो वर्षों में कितनी राजनीतिक चुनौती मिलेगी। इसके नतीजे भारत के लिए भी अहम होंगे, क्योंकि इनसे पाकिस्तान के साथ अमेरिकी रिश्तों, ईरान युद्ध, व्यापार और तकनीकी सहयोग की दिशा प्रभावित हो सकती है।

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