US Russian Oil Waiver Extension: ईरान युद्ध के बीच दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और इसी भारी दबाव में अमेरिका ने बड़ा फैसला लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने रूसी तेल खरीदने पर एक बार फिर से सभी को अस्थायी छूट दे दी है। अमेरिका-रूस तेल छूट का विस्तार के तहत पहले इस छूट को 11 अप्रैल से आगे बढ़ाने से पूरी तरह इनकार किया गया था। लेकिन अब एक नए नोटिफिकेशन के बाद इस विशेष छूट को 16 मई तक के लिए आगे बढ़ा दिया गया है।
ईरान के साथ चल रहे युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर बहुत भारी असर पड़ा है। दुनिया के करीब 20% तेल और गैस की सप्लाई इसी रूट से होती है और यहां मंडराता खतरा काफी बढ़ गया था। तेल की कीमतें तेजी से ऊपर जाने के कारण अमेरिका को बाजार में सप्लाई बनाए रखने के लिए यह अस्थायी राहत देनी पड़ी।
इस बड़े ऐलान के साथ ही तेल बाजार में थोड़ी राहत देखने को मिली है और ब्रेंट क्रूड की कीमत में भारी गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 9% गिरकर 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई जो पिछले एक महीने का सबसे निचला स्तर है। इस गिरावट की एक वजह ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को सीजफायर के दौरान कमर्शियल जहाजों के लिए खोलना भी माना जा रहा है।
रूस के राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रिएव के मुताबिक पहले छूट से करीब 100 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल बाजार में आसानी से आ सकता था। यह विशाल मात्रा लगभग एक दिन की पूरी वैश्विक तेल खपत के बराबर है जिससे बाजार को काफी बड़ा सहारा मिलता है। ऐसे में नई छूट से भी वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई को सहारा मिलने की बहुत ज्यादा उम्मीद जताई गई है।
US के इस बड़े फैसले से उसके सहयोगी देशों और खासकर यूरोपीय संघ में काफी ज्यादा नाराजगी बढ़ सकती है। यूरोप लंबे समय से रूस पर सख्त प्रतिबंध बनाए रखने की बात करता रहा है और किसी भी ढील देने के खिलाफ है। यूरोपीय यूनियन की उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने साफ कहा है कि अभी रूस पर ढील देने का बिल्कुल सही समय नहीं है।
US ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने 17 अप्रैल से छूट के लिए एक नया नोटिफिकेशन जारी कर के देशों को बड़ी अनुमति दी है। इसके तहत देशों को रूसी तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स खरीदने की अनुमति अब सीधे 16 मई तक दे दी गई है। यानी करीब एक महीने तक समुद्र में लोड किए गए रूसी तेल की खरीद पर कोई भी अमेरिकी प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
US का यह नया कदम पश्चिमी देशों की एकजुट रणनीति को कमजोर कर सकता है और कई गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। यूक्रेन युद्ध को लेकर बनी सख्त पॉलिसी पर भी सहयोगी देशों के बीच आपसी मतभेद अब खुलकर सामने आ सकते हैं। US के सामने मुख्य चुनौती ये थी कि अगर तेल सप्लाई और कम हुई तो आम लोगों पर महंगाई का बहुत बड़ा असर पड़ेगा।
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इससे पहले 30 दिन की जो विशेष छूट दी गई थी वह 11 अप्रैल को पूरी तरह से खत्म हो गई थी। तब साफ संकेत मिल रहे थे कि अब US रूस और ईरान के मुद्दे पर काफी ज्यादा सख्ती दिखाने वाला है। लेकिन होर्मुज संकट के हालात बदलते ही अमेरिका का फैसला भी बदल गया और बाजार को यह नई राहत मिल गई।