अमेरिका-पाकिस्तान संबंध फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
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ट्रंप को 'अंधेरे' में रखा PAK! अमेरिकी थिंक टैंक ने खोली शहबाज-मुनीर की पोल, बताया क्यों खतरनाक है यह दोस्ती

Gatestone Report: अमेरिकी थिंक टैंक गेट्सस्टोन इंस्टीट्यूट ने पाकिस्तान की 'दोहरी चाल' को बेनकाब किया है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान मेजर नॉन-NATO सहयोगी का फायदा उठाकर चुपके से अमेरिका विरोधी...

अमन उपाध्याय

Pakistan America Relations News In Hindi: अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में एक बार फिर कड़वाहट आने के संकेत मिल रहे हैं। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने अपने 'चापलूसी टैलेंट' से राष्ट्रपति ट्रंप को गुमराह किया है। थिंक टैंक गेट्सस्टोन इंस्टीट्यूट ने पाकिस्तान को एक भरोसेमंद साथी के बजाय 'अत्यधिक समस्याग्रस्त भागीदार' करार दिया है।

MNNA दर्जे पर पुनर्विचार की मांग

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि अमेरिका को पाकिस्तान को दिए गए मेजर नॉन-NATO सहयोगी (MNNA) दर्जे पर तुरंत दोबारा विचार करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस दर्जे के तहत मिलने वाले विशेष सैन्य और कूटनीतिक विशेषाधिकारों का उपयोग तो कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर वह अमेरिकी नीतियों की जड़ें खोद रहा है।

ईरान के साथ 'खुफिया' गठबंधन

सबसे बड़ा खुलासा जून 2025 के युद्ध को लेकर हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, जब इजरायल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ युद्ध लड़ा, तब पाकिस्तान ने अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को दरकिनार करते हुए ईरान का बिना शर्त समर्थन किया था। इसके तुरंत बाद अगस्त 2025 में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की पाकिस्तान यात्रा को वॉशिंगटन के लिए एक बड़ा 'कूटनीतिक तमाचा' माना जा रहा है।

चीन-पाकिस्तान-ईरान का नया 'त्रिकोण'

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान अब ईरान को CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) का हिस्सा बनाने में मदद कर रहा है। यह कदम अमेरिका के क्षेत्रीय प्रभाव को कम करने के लिए चीन, पाकिस्तान और ईरान के एक नए रणनीतिक गठबंधन को जन्म दे रहा है। इसके अलावा, पाकिस्तान अमेरिका के प्रतिबंधों की परवाह किए बिना ईरान के साथ द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा $2.8 बिलियन से बढ़ाकर $10 बिलियन तक ले जाने का लक्ष्य रख रहा है।

इजरायल विरोधी विचारधारा और गाजा का मुद्दा थिंक टैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की विचारधारा पूरी तरह से इजरायल विरोधी है और उसने आज तक इजरायल को मान्यता नहीं दी है। गाजा के मुद्दे पर भी पाकिस्तान का रुख अमेरिका के रुख से बिल्कुल उलट है, जिससे यह साबित होता है कि वह खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी रणनीतियों में मदद करने के बजाय केवल बाधाएं पैदा कर रहा है।

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