राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स- सोशल मीडिया) 
विदेश

ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, यौन हमला मामले में नहीं मिली राहत, 43 करोड़ का जुर्माना बरकरार

Trump Case Update: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने यौन हमला मामले में डोनाल्ड ट्रंप की अपील खारिज की। कोर्ट ने ई. जीन कैरोल को 50 लाख डॉलर या 43 करोड़ रुपये हर्जाना देने का फैसला बरकरार रखा है।

प्रिया सिंह

Donald Trump Case Update: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार 29 जून को यौन हमला मामले में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बहुत बड़ा झटका दिया है। जूरी के पुराने फैसले को पलटने की ट्रंप की अपील को शीर्ष अदालत ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप को इस कानूनी मामले में राहत मिलने की सभी उम्मीदें खत्म हो गई हैं। कोर्ट ने बिना कोई विशेष कारण बताए इस मामले में जूरी के फैसले को बरकरार रखने का महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है।

अदालत ने माना है कि ट्रंप ने पूर्व लेखिका ई. जीन कैरोल के साथ यौन हमला और उनकी भारी मानहानि की थी। इस सख्त फैसले के तहत उन्हें 50 लाख डॉलर यानी करीब 43 करोड़ रुपये का भारी-भरकम हर्जाना देना होगा। 9 मई 2023 को मैनहैटन की एक फेडरल अदालत ने 1996 में हुई इस घटना के लिए उन्हें दोषी ठहराया था। ट्रंप ने अदालत के इस फैसले पर अपनी भारी नाराजगी जताते हुए इसे पूरी तरह से एक फर्जी मामला बताया है।

कैरोल का यौन उत्पीड़न दावा

अब 82 साल की हो चुकीं पूर्व कॉलम लेखिका ई. जीन कैरोल ने 2019 में छपी अपनी किताब में यह बड़ा दावा किया था। उन्होंने बताया था कि 23 साल पहले न्यूयॉर्क के एक डिपार्टमेंट स्टोर के ट्रायल रूम में उनके साथ दुष्कर्म हुआ था। इसके जवाब में डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें पागल महिला कहा था और किसी भी तरह की मुलाकात से साफ इनकार किया था। ट्रंप का कहना था कि दशकों पुरानी एक तस्वीर सबूत नहीं हो सकती जिसमें वह कैरोल और उनके पति के साथ खड़े हैं।

ट्रंप के दावे और कड़ा बचाव

डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार यह दावा किया है कि वह ई. जीन कैरोल नाम की इस महिला से अपनी जिंदगी में कभी नहीं मिले। उनके अनुसार दशकों पुरानी एक साधारण सी तस्वीर को आधार बनाकर उनके खिलाफ गहरी साजिश रची जा रही है। उन्होंने देश की कानूनी व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए इसे कानून का गलत इस्तेमाल और बेवकूफी भरा दावा बताया है। कैरोल की वकील रोबर्टा कैपलन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला जूरी के सर्वसम्मत फैसले की ऐतिहासिक जीत है।

न्याय विभाग की नई आपराधिक जांच

इसी साल मई के आखिर में अमेरिकी न्याय विभाग ने ई. जीन कैरोल के खिलाफ एक आपराधिक जांच शुरू की है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार जांच का मकसद यह पता लगाना है कि क्या कैरोल ने गवाही के दौरान शपथ लेकर झूठ बोला था। कैरोल ने अदालत में कहा था कि उन्हें इस मामले में किसी भी बाहरी व्यक्ति से आर्थिक मदद नहीं मिली है। जबकि बाद में यह सच सामने आया था कि अरबपति रीड हॉफमैन ने उनकी कानूनी फीस का एक बड़ा हिस्सा चुकाया था।

राजनीतिक विरोधियों पर सीधा निशाना

इस ताजा जांच ने फिर इस बात को मजबूती से साबित कर दिया है कि ट्रंप एक नया राजनीतिक दांव चल रहे हैं। न्याय विभाग का इस्तेमाल कर ट्रंप अपने निजी राजनीतिक विरोधियों को लगातार निशाना बनाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कैरोल के पक्ष का मानना है कि यह फैसला साफ करता है कि ट्रंप ने यौन हमला किया था। इस कानूनी लड़ाई में 43 करोड़ रुपये का जुर्माना बरकरार रहना ट्रंप के लिए चुनावी साल में एक बहुत बड़ा झटका है।

CSR घाेटाला: महाराष्ट्र समेत 4 राज्यों के 8 ठिकानों पर ED की छापेमारी, फर्जी नेटवर्क का खुलासा

किसानों को मोदी कैबिनेट का बड़ा तोहफा, MSP में बढ़ोतरी की मंजूरी; ₹2.79 लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान

पंजाब में चिट्टे पर गरमाई सियासत! शाह का मान पर वार, बोले- पंजाब को नशा मुक्त करके रहेंगे

उमर खालिद और शरजील इमाम को फिर झटका, दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत अर्जी की खारिज

लालू परिवार की बढ़ीं मुश्किलें! ट्रांसफर के बाद नए जज प्रशांत कुमार करेंगे लैंड फॉर जॉब मामले की सुनवाई