अमेरिका-नोटो तनाव, फोटो (सो. सोशल मिडिया) 
विदेश

नाटो में मचेगा हड़कंप: अमेरिका ने बनाई 'अच्छे' और 'बुरे' देशों की लिस्ट, तुर्की-स्पेन पर गिर सकती है गाज

Us Nato Expel Countries: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान युद्ध में साथ न देने वाले नाटो सहयोगियों के लिए 'सजा और इनाम' की लिस्ट तैयार की है। तुर्की, स्पेन और फ्रांस जैसे देशों पर सैन्य कार्रवाई का खतरा

अमन उपाध्याय

Us Nato Expel Countries List: दुनिया के सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठन नाटो (NATO) के भीतर एक बड़ा भूचाल आने की संभावना है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने अपने नाटो सहयोगियों के प्रति बेहद सख्त रुख अपना लिया है।

रिपोर्टों के अनुसार, वाशिंगटन ने नाटो सदस्य देशों की एक 'अच्छे' और 'बुरे' देशों के आधार पर नई सूची तैयार की है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन देशों पर रणनीतिक दबाव बनाना है जिन्होंने ईरान के खिलाफ संभावित युद्ध में अमेरिका का सक्रिय रूप से साथ नहीं दिया है।

ईरान युद्ध बना विभाजन की मुख्य वजह

अमेरिका की इस नई नीति के केंद्र में ईरान के साथ जारी संघर्ष है। नाटो महासचिव मार्क रुटे के हालिया अमेरिका दौरे से पहले ही यह योजना तैयार कर ली गई थी, जिसमें देशों को उनके योगदान और समर्थन के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। जो देश अमेरिका की सैन्य योजनाओं और अंतरराष्ट्रीय रुख का समर्थन कर रहे हैं उन्हें 'आदर्श सहयोगी' माना जा रहा है जबकि असहमति जताने वाले देशों को सजा भुगतने की चेतावनी दी गई है।

किसे मिलेगा इनाम और कौन है 'हिट लिस्ट' में?

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बयानों के अनुसार, जो देश अपना रक्षा खर्च बढ़ा रहे हैं और सैन्य अभियानों में वाशिंगटन के साथ खड़े हैं, उन्हें सुरक्षा और हथियारों की आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाएगी।

इस श्रेणी में पोलैंड, रोमानिया, बुल्गारिया, चेक रिपब्लिक, अल्बानिया और बाल्टिक देश (एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया) शामिल हैं। पोलैंड विशेष रूप से अमेरिका का करीबी बनकर उभरा है, जहां करीब 10,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और वहां की सरकार इसका बड़ा खर्च खुद उठाती है।

दूसरी ओर, स्पेन, फ्रांस, इटली, ग्रीस और तुर्की जैसे देशों ने अमेरिका को अपने सैन्य ठिकाने इस्तेमाल करने से साफ मना कर दिया है। इसके साथ ही ईरान पर हमले को लेकर भी समर्थन नहीं दिया है। इन देशों को अब अमेरिका के कोपभाजन का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, ब्रिटेन (UK) ने भी शुरुआत में इनकार किया था, लेकिन बाद में अपने सैन्य अड्डों के सीमित इस्तेमाल की अनुमति दी है।

सजा का स्वरूप और संभावित दरार

जिन देशों को 'बुरे' सहयोगियों की सूची में रखा गया है उनके खिलाफ अमेरिका कड़े कदम उठा सकता है। इसमें उन देशों से अमेरिकी सैनिकों की संख्या में कटौती करना, संयुक्त सैन्य अभ्यासों को रद्द करना या कम करना और अत्याधुनिक हथियारों की सप्लाई रोकना शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस 'इनाम और सजा' की नीति से नाटो की एकता पूरी तरह चरमरा सकती है।

अमेरिका के भीतर भी उठ रहे हैं विरोध के स्वर

इस योजना की न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अमेरिका के भीतर भी आलोचना हो रही है। अमेरिकी सीनेटर रोजर विकर सहित कई विशेषज्ञों का कहना है कि सहयोगियों के प्रति इस तरह का व्यवहार रिश्तों को और खराब करेगा। अगर यह योजना लागू होती है तो यूरोप और अमेरिका के बीच की दरार इतनी गहरी हो सकती है जिसे भरना भविष्य में नामुमकिन होगा।

सपा नेता सिनोद शाक्य को BJP ने बनाया प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य, सोशल मीडिया पर वायरल हो रही लिस्ट

Hotel Room Safety: होटल में चेक-इन करते ही करें ये 10 जरूरी काम, सुरक्षा में न करें लापरवाही

गुवाहाटी के होटल में अंधाधुंध फायरिंग, गोलीबारी में 6 लोगों की मौत; सामने आया खौफनाक VIDEO

SIR पर विपक्ष के प्रदर्शन के जवाब में सड़क पर उतरेंगे केंद्रीय मंत्री! क्या है BJP का प्लान?

SIR के तीनों आदेश सर्वसम्मति से लिए गए, चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में जवाब