Iran Deal Lebanon Conflict Trump Netanyahu: दुनिया के दो सबसे करीबी सहयोगी माने जाने वाले अमेरिका और इजरायल के बीच इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। असल में, दोनों देशों के रिश्तों में ऐसी कड़वाहट आ गई है जिसे कूटनीतिक इतिहास के सबसे खराब दौर में गिना जा रहा है। इस तल्खी की मुख्य वजह ईरान के साथ अमेरिका का नया समझौता (MoU) और लेबनान पर इजरायल के निरंतर जारी हमले हैं।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सलाह को दरकिनार करते हुए लेबनान पर हमले जारी रखने का फैसला किया है। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से इजरायल को लेबनान और हिजबुल्लाह के प्रति नरमी बरतने की हिदायत दी थी, लेकिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि इजरायल दक्षिणी लेबनान के अपने 'सिक्योरिटी जोन' से पीछे नहीं हटेगा। उनके मुताबिक, अमेरिका-ईरान डील इजरायल के वजूद के लिए खतरा है। लेबनान में हुए हालिया हमलों में 16 लोगों की मौत के बाद दोनों देशों के बीच होने वाली अहम शांति वार्ता फिलहाल अनिश्चित काल के लिए टल गई है।
रिश्तों में आई इस खटास का अंदाजा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े शब्दों से लगाया जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने नेतन्याहू के लिए 'पागल' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि 'अगर मैं नहीं होता, तो तुम जेल में होते।' ट्रंप का गुस्सा इस बात पर है कि इजरायल की जिद की वजह से ईरान के साथ होने वाली डील और सीजफायर की कोशिशों पर असर पड़ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप अपनी इच्छा के विरुद्ध जाने वाले नेताओं को कतई पसंद नहीं करते।
केवल ट्रंप ही नहीं, बल्कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इजरायल को कड़ी फटकार लगाई है। वेंस ने उन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया दी जिसमें नेतन्याहू के गुस्से की बात कही गई थी। वेंस ने याद दिलाया कि इजरायल की रक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाले दो-तिहाई रक्षात्मक हथियार खुद अमेरिका ने ही बनाए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुनिया में जो इकलौते दोस्त बचे हैं (ट्रंप), उन पर हमला मत करो। वेंस ने इजरायली कैबिनेट को चेतावनी दी कि वे अमेरिका के साथ अपने संबंधों की वास्तविकता को समझें।
डोनाल्ड ट्रंप के लिए इस समय अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति सबसे ऊपर है। वे अमेरिका को मिडिल ईस्ट के युद्धों से बाहर निकालना चाहते हैं और घरेलू स्तर पर बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिर करना चाहते हैं।
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ईरान के साथ समझौते को ट्रंप अपनी बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं, लेकिन इजरायल के हमलों की वजह से ईरान ने आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह में शामिल होने से फिलहाल इनकार कर दिया है। लेबनान में हालिया हमलों में 16 लोगों की मौत ने इस कूटनीतिक संकट को और गहरा कर दिया है।