US Iran Peace Talks Islamabad Negotiations: मध्य पूर्व में जारी भीषण तनाव के बीच दुनिया की नजरें अब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिक गई हैं। शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय (Trilateral) वार्ता शुरू हो गई है। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य हाल ही में हुए अस्थाई युद्धविराम को स्थायी बनाना और पूरे क्षेत्र में जारी सैन्य तनाव को कम करना है।
सूत्रों के अनुसार, इस्लामाबाद में हो रही इस 'राउंड टेबल' बैठक में पाकिस्तान एक मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा है। वार्ता के पहले दिन के एजेंडे में तीन प्रमुख बिंदु शामिल रहे: युद्ध को पूरी तरह समाप्त करना, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर वैश्विक सहमति बनाना और भविष्य के लिए एक मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार करना। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बैठक की पुष्टि करते हुए कहा कि बातचीत आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है।
एक तरफ जहां बातचीत जारी है वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने दबाव की रणनीति भी बरकरार रखी है। उन्होंने ईरान को एक 'विफल राष्ट्र' (Failed Nation) करार दिया। तेल आपूर्ति के मुद्दे पर ट्रंप ने भरोसा जताते हुए कहा कि अमेरिका के पास तेल की कोई कमी नहीं है और कई टैंकर तेल लोड करने के लिए अमेरिका की ओर आ रहे हैं। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि होर्मुज जलडमरूमध्य बहुत जल्द अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुल जाएगा।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे ईरान पर कथित अमेरिकी-इजरायली हमलों के मुद्दे पर गंभीर और जिम्मेदार रुख अपनाएं तथा हमलावरों को जवाबदेह ठहराएं। शुक्रवार को जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ हुई फोन बातचीत में उन्होंने हालिया सैन्य घटनाक्रम की जानकारी दी, जिसकी जानकारी शनिवार को स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई।
तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अराघची ने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने अमेरिका पर अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के उल्लंघन का आरोप भी दोहराया।
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वहींं, मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, अराघची ने कहा कि ईरान ने संघर्ष खत्म करने, हुए नुकसान की भरपाई और हमलावरों को जवाबदेह बनाने जैसी शर्तों के आधार पर युद्धविराम को स्वीकार किया है। उन्होंने इसे एक “जिम्मेदार कदम” बताया और कहा कि इसे वैश्विक स्तर पर सराहा जाना चाहिए।