US Iran Peace Deal Nuclear Program Agreement: मिडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार की बढ़ती चिंताओं के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है और 14 जून 2026 को दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। इस डील के होते ही वैश्विक बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, इस समझौते का सबसे तात्कालिक असर सीधा समुद्री व्यापार पर पड़ेगा। उन्होंने घोषणा की है कि डील पर हस्ताक्षर होते ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तत्काल प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए दोबारा खोल दिया जाएगा। चूंकि वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ऊर्जा कीमतों में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
समझौते की रूपरेखा को लेकर ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करना है। उन्होंने इस डील को न्यूक्लियर हथियार न बनाने की एक 'दीवार' के रूप में पेश किया है, जो इस बात की गारंटी देगी कि ईरान भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार विकसित, खरीद या हासिल नहीं कर पाएगा। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि इस व्यवस्था से पूरे क्षेत्र में स्थिरता आएगी और वे भविष्य में ईरान व मिडिल ईस्ट के साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हैं।
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अपने बयान में ट्रंप ने बराक ओबामा प्रशासन की नीतियों की आलोचना करते हुए साफ किया कि इस बार ईरान को किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष वित्तीय भुगतान नहीं किया जाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले समझौतों में ईरान को बड़ी मात्रा में धन दिया गया था, लेकिन इस बार की शर्तें अलग हैं। इसके साथ ही, उन्होंने एक कड़ी चेतावनी भी दी कि यदि आवश्यकता पड़ी तो अमेरिका भूमिगत सुविधाओं सहित ईरान के परमाणु ढांचे को नियंत्रित करने के लिए उन्नत सैन्य क्षमताओं का उपयोग करने के अपने विकल्प खुले रखेगा।