US ईरान इस्लामाबाद पीस टॉक्स, (डिजाइन फोटो) 
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'सीधी बात' न करने की जिद... US के सामने ईरान ने झुककर मानी ये 3 बड़ी शर्तें! जानें पीस टॉक में क्या पक रहा है?

Us Iran Islamabad Peace Talks: अमेरिका और ईरान के बीच सीधी वार्ता शुरू हुई है। ईरान ने अपनी दशकों पुरानी 'नो डायरेक्ट टॉक' पॉलिसी को बदलते हुए तीन अहम मुद्दों पर लचीला रुख अपनाने के संकेत दिए हैं।

अमन उपाध्याय

Us Iran Islamabad Peace Talks Latest News: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार को अमेरिका और ईरान के बीच एक युगांतरकारी कूटनीतिक शुरुआत हुई है। दशकों की कड़वाहट के बाद, दोनों देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के बीच करीब दो घंटे तक आमने-सामने बैठक हुई। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य एक बेहद नाजुक युद्धविराम को स्थायी बनाना और मध्य पूर्व में क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करना है।

ईरान की नीति में बड़ा बदलाव

सूत्रों के अनुसार, इस वार्ता की सबसे बड़ी उपलब्धि ईरान का अपना कड़ा रुख बदलना रहा है। अब तक ईरान की आधिकारिक नीति थी कि वह अमेरिका के साथ कभी सीधा संवाद नहीं करेगा। हालांकि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की इस्लामाबाद में मौजूदगी के बाद ईरान को इस रुख से पीछे हटना पड़ा। यह भी गौर करने वाली बात है कि ईरान ने अपनी दो पूर्व शर्तों के पूरा न होने के बावजूद बातचीत की मेज पर बैठना स्वीकार किया है।

3 मुद्दों पर समझौता और लचीला रुख

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब तक तीन प्रमुख मुद्दों पर समझौते के लिए तैयार हो गया है। ईरानी डेलीगेशन का मानना है कि जेडी वेंस व्हाइट हाउस में उन गिने-चुने नेताओं में से हैं जो ईरान के साथ युद्ध नहीं चाहते हैं, इसलिए वे वेंस को 'खाली हाथ' नहीं भेजना चाहेंगे। दोबारा युद्ध की स्थिति को टालने के लिए ईरान ने कुछ अहम बिन्दुओं पर लचीला रुख अपनाने का निर्णय लिया है। हालांकि, ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी का दावा है कि उन्होंने यह बातचीत दक्षिणी लेबनान पर इजराइली हमलों में कमी और कुछ अन्य शर्तों के बाद शुरू की है।

दांव पर वेंस की प्रतिष्ठा

इस वार्ता की सफलता पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की राजनीतिक प्रतिष्ठा टिकी है। पाकिस्तान के लिए रवाना होने से पहले वेंस ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि वह अमेरिका के साथ 'खेल' न करे। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वार्ता को लेकर कहा है कि ईरान सैन्य रूप से हार चुका है और शांति वार्ता में उनके पास 'कोई पत्ते शेष नहीं हैं' वे आज केवल बातचीत करने के लिए ही बचे हुए हैं।

भारी मानवीय और आर्थिक कीमत

यह शांति वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब इस युद्ध ने भीषण तबाही मचाई है। आंकड़ों के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक ईरान में कम से कम 3,000 लोग, लेबनान में 1,953 और इजराइल में 23 लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा, फारस की खाड़ी के ग्लोबल इकोनॉमी से कट जाने के कारण ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं और कई देशों के बुनियादी ढांचे को गहरा नुकसान पहुंचा है।

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