F-15 विमान (AI फोटो) 
विदेश

क्या चीन की मिसाइल से गिरा अमेरिकी F-15 विमान? ईरान में हुए हादसे पर बड़ा खुलासा, ट्रंप प्रशासन में खलबली

US F15 Fighter Jet Crash: ईरान में दुर्घटनाग्रस्त हुए अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान को लेकर एक रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा किया गया है। क्या सच में चीन ने ईरान को दी थी गुप्त मिसाइल तकनीक?

अमन उपाध्याय

US F15 Fighter Jet Crash Chinese Missile: मीडिल ईस्ट से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने वाशिंगटन से लेकर बीजिंग तक हड़कंप मचा दिया है। पिछले महीने दक्षिण-पश्चिमी ईरान में दुर्घटनाग्रस्त हुए अमेरिकी वायुसेना के एक F-15 लड़ाकू विमान को लेकर सनसनीखेज दावे किए जा रहे हैं।

एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इस विमान को चीन में बनी 'कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल' (MANPADS) की मदद से मारा गया है। हालांकि अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामला गहन जांच के अधीन है, लेकिन इस दावे ने वैश्विक कूटनीति में नए समीकरण पैदा कर दिए हैं।

क्या है MANPADS और कैसे हुआ हमला?

अमेरिकी अधिकारियों और खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, यह विमान F-15E स्ट्राइक ईगल था, जो अपनी मारक क्षमता के लिए जाना जाता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए संकेत दिया था कि विमान को एक पोर्टेबल हथियार MANPADS से निशाना बनाया गया। ये मिसाइलें करीब 7 फीट लंबी और 40 पाउंड वजन की होती हैं, जिन्हें एक सैनिक आसानी से अपने कंधे पर रखकर चला सकता है। आमतौर पर इनका इस्तेमाल कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है, और यदि यह चीनी निर्मित थी, तो यह अमेरिका के लिए बड़ी चिंता का विषय है।

चीन की गुप्त सैन्य सहायता का पर्दाफाश?

NBC न्यूज की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन केवल मिसाइलें ही नहीं, बल्कि ईरान को अन्य महत्वपूर्ण सैन्य तकनीक भी उपलब्ध करा रहा है। इसमें स्टेल्थ विमान तकनीक और लंबी दूरी तक निगरानी करने वाले रडार सिस्टम शामिल हैं। इन उपकरणों की मदद से ईरानी सेना आधुनिक अमेरिकी विमानों को बेहतर तरीके से ट्रैक करने और उन पर हमला करने में सक्षम हो रही है। यह मामला इसलिए भी पेचीदा है क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वे ईरान को हथियार नहीं भेज रहे हैं। यदि यह रिपोर्ट सच साबित होती है, तो यह शी जिनपिंग के वादे पर बड़े सवाल खड़े करती है।

36 घंटे का रेस्क्यू

विमान गिरने के बाद का घटनाक्रम किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। विमान में सवार दो क्रू मेंबर्स ने पैराशूट के जरिए सुरक्षित छलांग लगा दी थी। इसके बाद अमेरिकी सेना ने 36 घंटे तक एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया। पायलट को तो 7 घंटे के भीतर ही सुरक्षित निकाल लिया गया था, लेकिन हथियार प्रणाली अधिकारी (WSO) को ढूंढने में ज्यादा समय लग गया।

पायलट ईरान के दुर्गम जाग्रोस पर्वत क्षेत्र में खुद को छिपाए रहे और करीब दो दिन बाद उन्हें वहां से निकाला जा सका। अमेरिकी रक्षा विभाग अभी भी इस बात की बारीकी से जांच कर रहा है कि विमान को गिराने के लिए असल में किस हथियार का इस्तेमाल किया गया था।

अमेरिका-चीन संबंधों पर असर

इस घटना का खुलासा अब ऐसे समय पर हुआ है, जब ट्रंप प्रशासन चीन के सहयोग से ईरान के साथ तनाव कम करने की कोशिश कर रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान वास्तव में चीनी हथियारों का इस्तेमाल अमेरिकी विमानों के खिलाफ कर रहा है तो इससे अमेरिका और चीन के द्विपक्षीय संबंधों में भारी तनाव पैदा होगा।

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