अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

US ने रूसी तेल प्रतिबंधों में छूट का किया बचाव, डेमोक्रेट्स ने उठाए फैसले पर गंभीर सवाल

US Defends Russian Oil Relief: अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने रूसी तेल पर प्रतिबंधों में दी गई अस्थायी छूट का बचाव किया। उनका कहना है कि इससे तेल की कीमतें 150 डॉलर तक जाने से रुक गईं।

प्रिया सिंह

US Treasury Secretary Defends Russian Oil Sanctions Exemption: अमेरिका और रूस के बीच प्रतिबंधों को लेकर एक बहुत ही बड़ी और अहम खबर सामने आई है। US के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने रूसी तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों में दी गई छूट का बचाव किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस अहम फैसले से दुनिया भर में तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी को रोका गया है। हालांकि, डेमोक्रेट नेताओं ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि इससे रूस को युद्ध के लिए पैसा मिल रहा है।

बाजार को स्थिर रखने की कोशिश

सीनेट की एक समिति के सामने बोलते हुए स्कॉट बेसेंट ने बताया कि यह कदम भारी अनिश्चितता के बीच उठाया गया था। उन्होंने जानकारी दी कि इस छूट के कारण ही करीब 25 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल वैश्विक बाजार में बनाए रखा जा सका है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में तेल की सप्लाई को पूरी तरह से स्थिर और सुरक्षित रखना था।

कीमतों में उछाल रुकने का दावा

बेसेंट ने दावा किया कि अगर रूस को यह छूट नहीं दी जाती तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ सकती थीं। उन्होंने कहा कि आज तेल की कीमत करीब 100 डॉलर है, लेकिन इस राहत के बिना यह 150 डॉलर तक जा सकती थी। उनके अनुसार यह नीति आम लोगों को राहत देने के लिए बनाई गई है क्योंकि कम कीमत जनता के लिए बेहतर है।

डेमोक्रेट नेताओं का कड़ा विरोध

इस छूट के फैसले पर कई प्रमुख डेमोक्रेट नेताओं ने अपनी कड़ी आपत्ति और भारी विरोध दर्ज कराया है। क्रिस कून्स ने कहा कि इस छूट से रूस को अरबों डॉलर मिल सकते हैं और उस पर आर्थिक दबाव काफी कम हो जाएगा। इसके साथ ही जैक रीड ने चिंता जताई कि US में लोग अब भी 4 डॉलर प्रति गैलन के हिसाब से महंगा पेट्रोल खरीद रहे हैं।

गरीब देशों की मांग पर फैसला

कून्स के सवालों का जवाब देते हुए बेसेंट ने इस बात से इनकार किया कि रूस या ईरान को कोई बहुत बड़ा फायदा हुआ है। उन्होंने बताया कि इस छूट को 30 दिनों के लिए बढ़ाने का फैसला दुनिया के कई गरीब और कमजोर देशों की मांग पर लिया गया है। करीब 10 से ज्यादा गरीब देशों ने US से इस छूट को आगे बढ़ाने की विशेष अपील की थी।

बाजार सुधरने की उम्मीद

बेसेंट ने उम्मीद जताई है कि आने वाले समय में तेल बाजार के हालात धीरे-धीरे और भी ज्यादा बेहतर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि तेल बाजार इस समय "बैकवर्डेशन" की स्थिति में है जिसका मतलब है कि आगे चलकर कीमतें कम हो सकती हैं। उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि संघर्ष खत्म होने पर पेट्रोल की कीमतें फिर से पहले जैसी या उससे भी कम हो जाएंगी।

वैश्विक तनाव और भारत पर असर

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से ही रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाना पश्चिमी देशों की नीति का एक अहम हिस्सा रहा है। हालांकि दुनिया में तेल की कीमतें अब भी अंतरराष्ट्रीय तनाव और विशेष रूप से मध्य पूर्व की अस्थिर स्थिति से प्रभावित होती हैं। वहां किसी भी तरह की गड़बड़ी से कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं जिसका सीधा असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर भी पड़ता है।

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